Jharkhand Big News: राजधानी रांची के भगवान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात एक बड़ा हादसा होते होते टल गया. इंडिगो की फ्लाइट संख्या-6E 7361 को तकनीकी कारणों के चलते हार्ड लैंडिंग करानी पड़ी, जिससे कुछ देर के लिए यात्रियों में अफरा तफरी का माहौल बन गया. लैंडिंग के समय विमान में तेज झटका महसूस हुआ, लेकिन पायलट की सतर्कता से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही. विमान में सवार सभी 75 यात्री सुरक्षित बताए गए हैं.
किसी भी यात्री को चोट नहीं आई
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार विमान तय समय से देरी से रात करीब 8.30 बजे रांची पहुंचा था. लैंडिंग के दौरान तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद पायलट ने एहतियातन हार्ड लैंडिंग का फैसला लिया. एयरपोर्ट डायरेक्टर विनोद कुमार ने कहा कि इस घटना में किसी भी यात्री को चोट नहीं आई है और विमान के बाहरी हिस्से को भी कोई नुकसान नहीं हुआ है. विमान को एप्रन रैंप से जोड़ने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली.
सुरक्षा को देखते हुए हार्ड लैंडिंग करानी पड़ती है
एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों ने बताया कि कुछ परिस्थितियों में सुरक्षा को देखते हुए हार्ड लैंडिंग करानी पड़ती है. ऐसे मामलों में विमान की पूरी तकनीकी जांच की जाती है ताकि यह तय किया जा सके कि अगली उड़ान के लिए वह पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं. इसी प्रक्रिया के तहत इस विमान को फिलहाल उड़ान के योग्य नहीं माना गया.
नाराज यात्रियों ने जताया विरोध
हार्ड लैंडिंग के बाद इसी विमान से रांची से भुवनेश्वर जाने वाली उड़ान निर्धारित थी. बड़ी संख्या में यात्री इसके लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे, लेकिन तकनीकी जांच शुरू होने के कारण उड़ान में देरी होती रही. रात करीब 9.40 बजे घोषणा की गई कि विमान फिलहाल उड़ान भरने की स्थिति में नहीं है और वैकल्पिक विमान की व्यवस्था भी संभव नहीं हो पा रही है. इससे नाराज यात्रियों ने कुछ समय के लिए विरोध भी जताया.
बाद में इंडिगो प्रबंधन ने यात्रियों के ठहरने के लिए होटल की व्यवस्था की. इसके अलावा भुवनेश्वर जाने वाले 35 यात्रियों को सड़क मार्ग से कार के जरिए भेजा गया. विमान की मरम्मत के लिए दिल्ली से इंजीनियरों की टीम के आने की जानकारी भी दी गई है.
यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ी
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि हवाई यात्रा में पायलट की सूझबूझ और समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी दुर्घटना को टाल सकता है. तकनीकी खामियों के बावजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन यात्रियों की जान बचाने में निर्णायक साबित हुआ, हालांकि उड़ान रद्द होने से यात्रियों को असुविधा जरूर झेलनी पड़ी.