SIR West Bengal: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. निर्वाचन आयोग ने एसआईआर 2026 के तहत मसौदा मतदाता सूची जारी करते हुए 58,20,898 वोटरों के नाम हटाए हैं. यह कार्रवाई मृत, लापता, स्थायी रूप से स्थानांतरित और डुप्लीकेट पाए गए नामों को लेकर की गई है. आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है.
58 लाख से अधिक नाम अब 2026 की मसौदा सूची में नहीं
राज्य में 294 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव अगले वर्ष प्रस्तावित हैं. इससे पहले निर्वाचन आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सार्वजनिक कर दी है. आयोग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 की मतदाता सूची में शामिल रहे 58 लाख से अधिक नाम अब 2026 की मसौदा सूची में नहीं हैं. आयोग का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों और सत्यापन के आधार पर की गई है. इससे पहले इसी तरह की कवायद बिहार में भी की जा चुकी है.
अलग-अलग कारणों की वजह से हटाए गए नाम
निर्वाचन आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनके पीछे अलग-अलग कारण हैं. जांच के दौरान कई वोटरों के एसआईआर एन्यूमरेशन फॉर्म एकत्र नहीं किए जा सके. कुछ मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले, कई स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर चले गए, बड़ी संख्या में मतदाता मृत पाए गए और कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाया गया.
हटाए गए नामों में सबसे बड़ी संख्या मृत मतदाताओं की
आंकड़ों के अनुसार हटाए गए नामों में सबसे बड़ी संख्या मृत मतदाताओं की है. कुल 24,16,852 नाम इस श्रेणी में आए. इसके अलावा 19,88,076 मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए. 12,20,038 मतदाता लापता की श्रेणी में दर्ज किए गए. 1,38,328 नाम डुप्लीकेट पाए गए जबकि 57,604 नाम अन्य कारणों से सूची से बाहर किए गए.
आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटाए गए हैं, उन्हें आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा. आयोग के मुताबिक 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं. इसके लिए संबंधित व्यक्ति को फॉर्म 6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे. ड्राफ्ट सूची आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ceowestbengal.wb.gov.in/asd-sir पर उपलब्ध कराई गई है.
मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाया जाना चुनावी माहौल में अहम माना जा रहा है. एक ओर निर्वाचन आयोग इसे पारदर्शिता और शुद्धिकरण की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों की नजर इस कदम पर टिकी है. आने वाले दिनों में आपत्ति और दावों की प्रक्रिया यह तय करेगी कि अंतिम मतदाता सूची किस हद तक संतुलित और स्वीकार्य बन पाती है.