जानिए क्या है बड़ा बदलाव
वर्तमान में चल रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत, केंद्र सरकार मज़दूरी का 100% और सामग्री लागत का 75% वहन करती है, जिसके कारण योजना के कुल खर्च का औसतन 90% केंद्र उठाता है, और राज्य की हिस्सेदारी केवल 10% रहती है।
इसके विपरीत, प्रस्तावित जी राम जी योजना में फंडिंग पैटर्न को बदलकर 60% केंद्र और 40% राज्य सरकार के बीच साझा करने का प्रस्ताव है। यह बदलाव झारखंड पर अत्याधिक वित्तीय बोझ डालेगा, जिससे मनरेगा के तहत चलाई जाने वाली योजनाओं पर राज्य का खर्च 2.69 गुना तक बढ़ जाएगा।
100 दिन के बजाय 125 दिन का काम
जी राम जी योजना में ग्रामीणों को 100 दिन के बजाय 125 दिन काम देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, काम के दिनों में यह वृद्धि वित्तीय मामलों में की जा रही भारी कटौती के सामने फीकी पड़ सकती है।
केंद्र की राशि में पहले ही कटौती
रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार मनरेगा के मद में झारखंड को दी जाने वाली राशि में पहले से ही कटौती करती रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जहां झारखंड को ₹3489.83 करोड़ मिले थे, वहीं 2024-25 में यह राशि घटकर ₹2721.53 करोड़ हो गई, और चालू वित्त वर्ष (2025-26) में अब तक यह केवल ₹2443.98 करोड़ है।
नए फंडिंग पैटर्न के साथ, राज्य सरकार को अब इस घटी हुई राशि के बावजूद योजना के 40% वित्तीय हिस्सेदारी की जिम्मेदारी लेनी होगी, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त ₹1000 करोड़ का सालाना बोझ तय माना जा रहा है।
मनरेगा में केंद्र से झारखंड को मिली राशि करोड़ में वित्तीय वर्ष
2025-26 - 2443.98
2024-25 -2721.53
2023-24 -2585.10
2022-23 - 2731.96
2021-22 -2724.55
2020-21 -3489.83