प्रतिभागियों का स्वागत एवं प्रशिक्षण की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो द्वारा सभी प्रतिभागियों का फूल का पौधा भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इसके बाद प्रशिक्षण सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें कुष्ठ रोग से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
समय पर इलाज से रोकी जा सकती है दिव्यांगता
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने अपने संबोधन में कहा कि कुष्ठ रोग की जल्द पहचान और समय पर इलाज से दिव्यांगता को पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा कुष्ठ रोगियों को इलाज की अवधि के दौरान प्रतिमाह ₹500 की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने सभी सीएचओ से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण में मिली जानकारी को जमीनी स्तर पर लागू करें और रोगियों के साथ सामान्य व्यवहार सुनिश्चित करें।
नया संशोधित एमडीटी उपचार पर विशेष जानकारी
प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने कुष्ठ रोग के लक्षण, प्रकार, कार्डिनल सिम्पटम्स, डायग्नोसिस और उपचार की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से पूरे देश में कुष्ठ रोग का नया संशोधित एमडीटी (Multi Drug Therapy) उपचार लागू किया गया है, जिसे शत-प्रतिशत लागू करना अत्यंत आवश्यक है।
सेल्फ केयर और सर्जरी पर जानकारी
कार्यक्रम में खगेन दास गुप्ता ने डीपीएमआर योजना के तहत सेल्फ केयर और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं, जिससे कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार संभव हो सके।
भ्रांतियां दूर करने पर दिया गया जोर
जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. रंजीत कुमार पांडा ने कहा कि कुष्ठ रोग को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकारी जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ कुष्ठ मरीजों तक पहुंचाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर बल दिया।
धन्यवाद ज्ञापन एवं सहयोग
कार्यक्रम के अंत में हृषिकेश गिरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। प्रशिक्षण को सफल बनाने में जिला कुष्ठ निवारण कार्यालय के सोशल वर्कर कुंदन कुमार, ऋषिकेश गिरी, सबल सेंटर के सौमेन साहा, त्रिलोचन जी और अनीता दास का महत्वपूर्ण योगदान रहा।