Jharkhand News: झारखंड में अवैध बालू खनन को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में जानबूझकर पेसा कानून को लागू नहीं किया जा रहा है, ताकि बालू की लूट बेरोकटोक जारी रह सके. उनका आरोप है कि जमशेदपुर से लेकर अन्य इलाकों तक सुवर्णरेखा नदी से खुलेआम अवैध खनन हो रहा है और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है.
सुवर्णरेखा नदी से नावों के जरिए बालू निकाली जा रही
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जमशेदपुर के भुइयांडीह क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी से नावों के जरिए बालू निकाली जा रही है. बालू को बोरों में भरकर नदी किनारे जमा किया जाता है और इसके बाद परिवहन शुरू होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में सरकार, माफिया और पुलिस की मिलीभगत है.
हाई कोर्ट की रोक के बावजूद अवैध खनन धड़ल्ले से जारी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाई कोर्ट ने बालू खनन पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है. उनके अनुसार सरकार कोर्ट में समय मांगती है और बाहर आते ही जनता को लूटने का सिलसिला शुरू हो जाता है. अवैध रूप से निकाली गई बालू ऊंचे दामों पर बेची जा रही है.
झारखंड के संसाधनों को दीमक की तरह खत्म किया जा रहा
उन्होंने कहा कि सरकार और माफिया एक दूसरे पर निर्भर हो चुके हैं. सरकार कार्रवाई नहीं करती और माफिया समय पर अपना हिस्सा पहुंचाते हैं. परत-दर-परत झारखंड के संसाधनों को दीमक की तरह खत्म किया जा रहा है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिन लोगों को जल जंगल जमीन के नाम पर सत्ता मिली, उन्हीं के लालच से राज्य की प्राकृतिक संपदा खतरे में है. उन्होंने दावा किया कि जैसे पहले घोटालों का हिसाब हुआ, वैसे ही बालू लूट का भी हिसाब होगा.
जमीनी स्तर पर निगरानी जरुरी
अवैध बालू खनन को लेकर विपक्ष का हमला सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चुनौती बनता दिख रहा है. हाई कोर्ट की रोक के बावजूद खनन के आरोप यह सवाल खड़े करते हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी और कानून का पालन कितना प्रभावी है. आने वाले समय में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में और तेज हो सकता है.