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  • 2025-12-26

Jharkhand News: झारखंड पुलिस में शीर्ष पद खाली, DG से SP तक कई जिम्मेदारियां प्रभार में, बड़े फेरबदल की तैयारी

Jharkhand News: झारखंड पुलिस की शीर्ष प्रशासनिक संरचना इस समय असंतुलन के दौर से गुजर रही है. राज्य में डीजी से लेकर एसपी स्तर तक बड़ी संख्या में पद खाली हैं और कई अहम जिम्मेदारियां प्रभार के भरोसे चलाई जा रही हैं. इसका सीधा असर पुलिस प्रशासन की कार्यक्षमता और निर्णय प्रक्रिया पर पड़ रहा है. इसी बीच सरकार बड़े स्तर पर पदोन्नति और फेरबदल की तैयारी में जुट गई है.

खाली और प्रभार में चल रहे पद
राज्य पुलिस मुख्यालय से लेकर फील्ड पोस्टिंग तक कई महत्वपूर्ण पद नियमित नियुक्ति के बिना संचालित हो रहे हैं. डीजी, एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी स्तर पर कई पद या तो रिक्त हैं या फिर अस्थायी प्रभार में हैं. इससे प्रशासनिक स्थिरता प्रभावित हो रही है और कई विभागों में दोहरी जिम्मेदारी का बोझ बढ़ गया है.

आईपीएस पदों पर प्रभार की स्थिति
झारखंड पुलिस में आईपीएस अधिकारियों के कई पद प्रभार में चल रहे हैं. इनमें ट्रेनिंग, स्पेशल ब्रांच, एसीबी, सीआईडी जोनल, डीआईजी और कई एसपी स्तर के पद शामिल हैं. इसके अलावा जैप आईआरबी, एसआईएसएफ और वायरलेस जैसे यूनिट्स में भी नियमित नियुक्ति नहीं हो पाई है.

संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी
राज्य सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की प्रक्रिया तेज कर दी है. करीब 16 आईपीएस अधिकारियों को विभिन्न रैंक पर पदोन्नति देने की तैयारी है. इसमें एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी सेलेक्शन ग्रेड तक की प्रमोशन शामिल है. इसके बाद कई खाली पदों पर स्थायी नियुक्ति संभव होगी.

बढ़ेगी एसपी रैंक की संख्या
पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद झारखंड पुलिस में एसपी रैंक के अधिकारियों की संख्या में इजाफा होगा. इससे जिलों और विशेष इकाइयों में नेतृत्व मजबूत होने की उम्मीद है. लंबे समय से प्रभार में चल रहे पदों पर भी नियमित अधिकारी तैनात किए जा सकेंगे.

रिक्त और प्रभार व्यवस्था पर चल रहे पद प्रशासनिक कमजोरी
झारखंड पुलिस में लंबे समय से रिक्त और प्रभार व्यवस्था पर चल रहे पद प्रशासनिक कमजोरी की ओर इशारा करते हैं. सुरक्षा चुनौतियों और कानून व्यवस्था की जटिलताओं के बीच स्थायी नेतृत्व की कमी फैसलों की गति और जवाबदेही दोनों को प्रभावित करती है. प्रस्तावित पदोन्नति और फेरबदल अगर समय पर लागू होते हैं तो इससे न केवल संगठनात्मक ढांचा मजबूत होगा बल्कि फील्ड लेवल पर पुलिसिंग की प्रभावशीलता भी बेहतर हो सकती है.
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