Rail Accident: बिहार के जमुई जिले में एक बड़ा रेल हादसा सामने आया है जहां सीमेंट लदी एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. हादसा इतना गंभीर था कि मालगाड़ी के कई डिब्बे पलट गए और कुछ डिब्बे नदी में जा गिरे. इस घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया और रेल प्रशासन में भी हड़कंप मच गया.
कहां और कैसे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना जमुई जिले के टेलवा बाजार हॉल्ट रेलवे स्टेशन के पास हुई. मालगाड़ी जैसे ही इस इलाके से गुजर रही थी उसी दौरान अचानक उसके डिब्बे पटरी से उतरने लगे. प्रत्यक्ष रूप से देखा गया कि पांच डिब्बे सीधे नदी में गिर गए जबकि करीब दस डिब्बे आसपास पलट गए.
कियुल और जसीडीह रेल खंड परिचालन बाधित
इस हादसे के कारण कियुल और जसीडीह रेल खंड पर रेल परिचालन पूरी तरह से बाधित हो गया है. अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई है. यह रेल मार्ग बिहार और झारखंड को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण खंड माना जाता है जिससे रोजाना बड़ी संख्या में ट्रेनें गुजरती हैं.
रेलवे प्रशासन की कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे के अधिकारी और तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई. पटरी से उतरे डिब्बों को हटाने और रेल लाइन को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है. रेलवे प्रशासन की ओर से इस मार्ग पर जल्द से जल्द यातायात बहाल करने की कोशिश की जा रही है.
कोई हताहत नहीं
इस पूरे हादसे में राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है. न तो ट्रेन कर्मियों और न ही आसपास मौजूद किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर सामने आई है. रेलवे प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
इससे पहले असम में भी एक बड़ा रेल हादसा सामने आया था जब सैरांग नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस हाथियों के झुंड से टकरा गई थी. उस हादसे में ट्रेन का इंजन और पांच डिब्बे पटरी से उतर गए थे. हालांकि उसमें भी यात्रियों को कोई चोट नहीं आई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार राजधानी एक्सप्रेस आठ हाथियों के झुंड से टकराई थी जिनमें से अधिकांश की मौत हुई. बताया गया कि यह इलाका हाथियों के नियमित गलियारे में शामिल नहीं है. लोको पायलट ने हाथियों को देखकर आपातकालीन ब्रेक लगाए थे लेकिन टक्कर को टाला नहीं जा सका.
रेलवे सुरक्षा और ट्रैक निगरानी व्यवस्था पर सवाल
जमुई में हुआ यह हादसा एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और ट्रैक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. कियुल जसीडीह रेल खंड जैसे व्यस्त रूट पर इस तरह की दुर्घटना से न केवल यातायात बाधित होता है बल्कि हजारों यात्रियों की आवाजाही भी प्रभावित होती है. राहत की बात यह है कि इस हादसे में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ लेकिन ऐसे मामलों से सबक लेते हुए रेलवे को तकनीकी जांच और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है. लगातार हो रहे रेल हादसे यह संकेत देते हैं कि समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है.