National Politics: नया साल देश की राजनीति में बड़े बदलावों के संकेत दे रहा है. आने वाले महीनों में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं राज्यसभा में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली होने जा रही हैं. इन चुनावों का असर केवल राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव केंद्र की राजनीति और संसद के उच्च सदन की ताकत पर भी साफ नजर आएगा.
इन राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव
आने वाले समय में पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और असम जैसे अहम राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे. इन राज्यों में सत्ता परिवर्तन की अटकलें पहले से ही तेज हैं. इन चुनावों के नतीजे न केवल राज्य सरकारों की दिशा तय करेंगे, बल्कि राज्यसभा की गणित को भी प्रभावित करेंगे.
राज्यसभा की 75 सीटों पर चुनाव
नए साल में राज्यसभा की कुल 75 सीटें खाली होंगी. ये सीटें अप्रैल, जून और नवंबर के दौरान रिक्त होंगी. इन चुनावों के जरिए एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच उच्च सदन में शक्ति संतुलन बदलने की संभावना है. यही कारण है कि दोनों खेमों की नजर इन सीटों पर टिकी हुई है. आगामी राज्यसभा चुनावों में बिहार और उत्तर प्रदेश से 10-10 सीटें खाली होंगी. इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कई पूर्वोत्तर राज्यों में भी रिक्तियां सामने आएंगी. यह स्थिति राज्यसभा चुनावों को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बना देती है
वरिष्ठ नेताओं का भविष्य दांव पर
जिन नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है, उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन शामिल हैं. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ये नेता दोबारा संसद में पहुंच पाएंगे या उनकी जगह नए चेहरे आएंगे.
इन राज्यों से होंगी सबसे ज्यादा रिक्तियां
अप्रैल से जून और फिर नवंबर के बीच महाराष्ट्र की 7 और बिहार की 5 सीटें राज्यसभा में खाली होंगी. झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से भी सदस्य सेवानिवृत्त होंगे. उत्तर प्रदेश की 10 सीटें नवंबर तक खाली होनी हैं. इसी अवधि में मध्य प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से भी सांसदों का कार्यकाल समाप्त होगा.
महाराष्ट्र की सियासत पर नजर
महाराष्ट्र में अप्रैल में राज्यसभा की 7 सीटों पर चुनाव होंगे. शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक हालात में शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी की वापसी को लेकर असमंजस बना हुआ है. सत्तारूढ़ महायुति को यहां बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. वहीं महाविकास अघाड़ी के सामने उम्मीदवार उतारने या समर्थन देने का फैसला रणनीतिक होगा.
कर्नाटक और यूपी की तस्वीर
कर्नाटक से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और एचडी देवेगौड़ा क्रमशः जून और अप्रैल में सेवानिवृत्त होंगे. राज्य की 4 सीटों पर चुनाव होंगे. अनुमान है कि कांग्रेस को 3 सीटें मिल सकती हैं जबकि विपक्ष को एक सीट क्रॉस वोटिंग से मिल सकती है. उत्तर प्रदेश में नवंबर तक 10 सीटों पर चुनाव होंगे. भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए उसे 8 सीटें मिलने की संभावना है जबकि समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिल सकती हैं और बसपा को नुकसान हो सकता है.
मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की स्थिति
मध्य प्रदेश से जॉर्ज कुरियन और दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. राजस्थान से भी जून में एक सीट खाली होगी. झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन से उनकी राज्यसभा सीट पहले ही रिक्त हो चुकी है. गुजरात, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों से भी कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है.
बंगाल और तमिलनाडु में बड़ी रिक्तियां
पश्चिम बंगाल से साकेत गोखले सहित 5 सांसद और तमिलनाडु से थंबी दुरई तथा तिरुचि शिवा समेत 6 सांसद सेवानिवृत्त होंगे. इसके अलावा असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से भी सदस्य राज्यसभा से बाहर होंगे. मनोनीत सदस्यों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल भी मार्च में समाप्त हो रहा है.
राज्यसभा में मौजूदा संख्या बल
वर्तमान में एनडीए के पास राज्यसभा में 129 सीटें हैं जबकि विपक्ष के पास 78 सीटें हैं. ऐसे में 2026 के राज्यसभा चुनाव उच्च सदन की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं. बिहार में 9 अप्रैल को 5 सीटें खाली होंगी जहां भाजपा और जदयू को 2-2 सीटें मिलने की संभावना है जबकि एक सीट चिराग पासवान को मिल सकती है.
एनडीए और विपक्ष दोनों के लिए यह दौर रणनीतिक रूप से अहम
आने वाला साल भारतीय राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है. विधानसभा चुनावों और राज्यसभा की बड़ी संख्या में रिक्तियों के चलते सत्ता संतुलन में बदलाव की पूरी संभावना है. एनडीए और विपक्ष दोनों के लिए यह दौर रणनीतिक रूप से अहम है. राज्यसभा की बदलती संख्या आने वाले विधायी एजेंडे, सरकार की कार्यशैली और विपक्ष की भूमिका को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी. यही वजह है कि हर दल इन चुनावों को केवल सीटों की लड़ाई नहीं बल्कि भविष्य की राजनीति की नींव के तौर पर देख रहा है.