युवाओं को रोजगार देने वाला बनने की अपील
राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्हें रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि एनआईटी का सेंटर फॉर इनोवेशन स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है. ऐसे प्रयास देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को मजबूती देंगे.
तेजी से बदलती तकनीक का दौर
राष्ट्रपति ने कहा कि एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा प्राप्त करना स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है. इस अवसर पर उन्होंने गोविंद देव गिरी जी और रविंद्र बेहरा को मानद उपाधि मिलने पर बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की. राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा समय में तकनीक अभूतपूर्व गति से बदल रही है. ऐसा बदलाव पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने कहा कि जहां तकनीक नए अवसर लेकर आ रही है, वहीं इसके साथ कई नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. साइबर अपराध बढ़ रहे हैं और ई वेस्ट से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है.
चुनौतियों के समाधान में संस्थानों की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि एनआईटी जैसे संस्थानों से यह अपेक्षा है कि वे तकनीक के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और समाधान तलाशने में सक्रिय भूमिका निभाएं. कई समस्याएं ऐसी हैं जिनके लिए मल्टी स्टेकहोल्डर अप्रोच जरूरी है. तकनीक को आर्थिक और सामाजिक रूप से व्यवहारिक बनाने में अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री और उद्योग जगत की भूमिका महत्वपूर्ण है.
डिग्री से आगे शिक्षा का उद्देश्य
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने वाले केंद्र नहीं होते. ये शोध के प्रमुख केंद्र और राष्ट्र की बौद्धिक प्रयोगशालाएं होते हैं. यहीं से देश के भविष्य की दिशा तय होती है. उन्होंने कहा कि शिक्षित इंजीनियरों को राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी निभानी चाहिए और तकनीकी विकास को मानव कल्याण से जोड़ना चाहिए.
रैंकिंग से नहीं योगदान से पहचान
राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी तकनीकी संस्थान की प्रतिष्ठा केवल रैंकिंग या प्लेसमेंट से नहीं मापी जानी चाहिए. असली पहचान इस बात से बनती है कि संस्थान और उसके विद्यार्थी समाज और देश के विकास में कितना योगदान दे रहे हैं. विकसित भारत के लक्ष्य के लिए युवाओं को कुशल कार्यबल के रूप में तैयार करना जरूरी है.
विकसित भारत का वास्तविक अर्थ
राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल ऊंची इमारतों और मजबूत अर्थव्यवस्था से पूरा नहीं होगा. इसका असली मतलब है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन पहुंचे. उन्होंने कहा कि एनआईटी जैसे संस्थानों को रिसर्च और इनोवेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि भारत नॉलेज सुपर पावर बन सके.
नैतिकता और करुणा पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि करुणा के बिना किया गया आविष्कार केवल मशीनें बना सकता है. करुणा से प्रेरित नवाचार ही समाज के लिए वरदान बनता है. उन्होंने छात्रों से कहा कि जीवन में चुनौतियां आएंगी और ऐसे समय में चरित्रबल और नैतिक मूल्य ही सही दिशा दिखाएंगे. सफलता का पैमाना केवल बड़ा पैकेज या ऊंचा पद नहीं बल्कि समाज में लाया गया सकारात्मक बदलाव होना चाहिए.
उपाधि प्राप्त करना मेहनत का परिणाम है
दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि उपाधि प्राप्त करना मेहनत का परिणाम है और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है. उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि जब दो लोगों को मानद उपाधि दी गई तो अपेक्षित तालियां नहीं बजीं. उन्होंने कहा कि अगर आज ताली नहीं बजेगी तो आगे कौन बजाएगा. इसके बाद सभागार तालियों से गूंज उठा.
तकनीक और नवाचार का असली मूल्य तभी है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह संबोधन तकनीकी शिक्षा के सामाजिक और नैतिक दायित्व को स्पष्ट रूप से सामने रखता है. उन्होंने यह संदेश दिया कि तकनीक और नवाचार का असली मूल्य तभी है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. एनआईटी जैसे संस्थानों के लिए यह सिर्फ प्रेरणा नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है कि वे शोध, नवाचार और मानवीय मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाएं.