80 वर्ष की उम्र पार कर चुके डॉ. मुखर्जी आज भी रोज़ाना दो से तीन घंटे गरीब मरीजों को समय देते हैं। दवा कंपनियों से मिलने वाली मुफ्त दवाओं को वे जरूरतमंदों में बांट देते हैं और उनके क्लिनिक से कोई भी मरीज बिना इलाज लौटता नहीं है।
आज के महंगे इलाज के दौर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे लोग किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। उनके लिए डॉक्टर होना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा दिया गया वह दायित्व है, जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग की सेवा करना है, न कि सिर्फ मुनाफा कमाना। उन्होंने अपने चिकित्सा पेशे के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी पूरी निष्ठा से निभाया है।
डॉ. मुखर्जी आज भी गरीब मरीजों से इलाज के लिए मात्र पाँच रुपये की टोकन फीस लेते हैं। रांची के लालपुर चौक स्थित उनके क्लिनिक में रोज़ मरीजों की लंबी कतार देखने को मिलती है। यहां न सिर्फ गरीब, बल्कि समाज के हर वर्ग के लोग स्वास्थ्य परामर्श और इलाज के लिए आते हैं।
राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS), रांची के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. मुखर्जी का जीवन मंत्र है—गरीबों की सेवा। इसी उद्देश्य के साथ वे पिछले पाँच दशकों से रांची समेत झारखंड के कई जिलों के हज़ारों मरीजों का इलाज बेहद कम शुल्क में कर रहे हैं।
रांची के अलावा गुमला, खूंटी, बोकारो, हजारीबाग, लातेहार, पलामू और सिमडेगा जैसे जिलों से भी लोग उनके पास इलाज के लिए आते हैं। उनकी निस्वार्थ सेवा को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा है।
इसके अतिरिक्त भी उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। अमिताभ बच्चन ने उन्हें ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सम्मानित किया था। साथ ही CNN-IBN और उद्योगपति मुकेश अंबानी द्वारा भी उनकी सेवाओं को सराहा गया है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के यहां विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज उपलब्ध है। वे वास्तव में चिकित्सा क्षेत्र में मानवता और सेवा की मिसाल हैं|