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  • 2026-01-02

Jamshedpur Education News: जमशेदपुर में BPL छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति बंद होने पर निजी स्कूलों का विरोध, नरभेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल में संगठन ने उठाए सवाल

Jamshedpur Education News: जमशेदपुर में बीपीएल छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति बंद किए जाने के फैसले को लेकर निजी स्कूलों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस की ओर से नरभेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल, बिष्टुपुर परिसर में इस मुद्दे पर जानकारी दी. संगठन ने राज्य सरकार के फैसले को गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा के खिलाफ बताया.

संगठन के अध्यक्ष नकुल कामानी, उपाध्यक्ष जियान तनेजा, मानद सचिव डॉ श्रीकांत नायर, कोषाध्यक्ष आर के झुनझुनवाला सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से 17 नवंबर 2025 को जारी पत्र के आधार पर जमशेदपुर के कई निजी स्कूलों को बीपीएल छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति से वंचित कर दिया गया है. विभाग का तर्क है कि टाटा स्टील से लीज पर ली गई जमीन पर संचालित स्कूल सरकारी सहायता प्राप्त श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन्हें भुगतान नहीं किया जाएगा.

स्कूल पूरी तरह लीज जमीन पर संचालित, देना होता है किराया
संगठन ने स्पष्ट किया कि संबंधित स्कूलों को झारखंड सरकार से न तो जमीन मिली है और न ही कोई आर्थिक सहायता. टाटा स्टील से ली गई जमीन पूरी तरह लीज पर है, जिसके लिए स्कूल नियमित रूप से वार्षिक किराया देते हैं. ऐसे में इन्हें सरकारी सहायता प्राप्त मानना तथ्यात्मक रूप से गलत है.

संगठन ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 2011 से राज्य सरकार बीपीएल छात्रों की फीस का भुगतान कर रही थी. प्रति छात्र 425 रुपये प्रतिमाह की दर तय की गई थी, जो वास्तविक खर्च से काफी कम थी, फिर भी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत स्कूलों ने इसे स्वीकार किया. दिसंबर 2020 के आदेश के बाद यह भुगतान पूरी तरह रोक दिया गया, जिससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है.

जमशेदपुर देश का एकमात्र ऐसा शहर जहां रोका गया भुगतान
एसोसिएशन का कहना है कि जमशेदपुर देश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां इस तरह का निर्णय लागू किया गया है. कई बार विभाग को पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है. वर्ष 2024 में सरकार से यह भी पूछा गया था कि सरकारी स्कूलों में बीपीएल छात्रों के लिए कितनी सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन इस पर भी कोई जवाब नहीं मिला. संगठन ने संकेत दिया है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो बीपीएल छात्रों का नामांकन रोकने या न्यायिक रास्ता अपनाने पर विचार किया जा सकता है.

गरीब बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा असर
बीपीएल छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति का मामला प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारी का सवाल बन गया है. निजी स्कूलों और सरकार के बीच संवाद की कमी से स्थिति उलझ रही है. समाधान न निकलने की स्थिति में इसका सीधा असर गरीब बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा.
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