Jharkhand News: झारखंड सचिवालय सेवा के पदाधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष और प्रशासनिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सचिवालय सेवा के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव करते हुए तीन चरणों में अनिवार्य प्रशिक्षण व्यवस्था लागू की है. इसका उद्देश्य पदाधिकारियों की कार्यशैली में सुधार, निर्णय क्षमता को मजबूत करना और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना है.
नई व्यवस्था के तहत सेवा में प्रवेश से लेकर पदोन्नति तक अलग-अलग स्तर पर प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है. इससे सचिवालय सेवा के अधिकारी और कर्मचारी समय के साथ बदलती प्रशासनिक जरूरतों और तकनीकी चुनौतियों के अनुरूप खुद को अपडेट कर सकेंगे.
तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण
- प्रशिक्षण का पहला चरण आधारभूत प्रशिक्षण होगा, जिसकी अवधि आठ सप्ताह निर्धारित की गई है. यह प्रशिक्षण सेवा में पहली बार नियुक्त होने के समय दिया जाएगा. इसमें सचिवालय और अध्यक्षालयों की संरचना, विभागों का संगठन, विभिन्न स्तर के पदाधिकारियों के कार्य और उत्तरदायित्व, फाइल संचालन, पत्राचार, डाक व्यवस्था, अभिलेख प्रबंधन, कार्यालय अनुशासन और कंप्यूटर का मूलभूत प्रशिक्षण शामिल है. इस चरण में AI सहित विभागों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
- दूसरा चरण सेवाकालीन या विभागीय प्रशिक्षण का होगा, जिसकी अवधि दो सप्ताह तय की गई है. यह प्रशिक्षण छह से आठ वर्षों में एक बार दिया जाएगा. इसके तहत परीक्ष्यमान सहायक प्रशाखा पदाधिकारी आवंटित विभागों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे. इस दौरान वे स्थापना शाखा के कार्य, कार्यालय प्रबंधन, लेखन सामग्री और उपस्कर के रखरखाव, टेलीफोन बिल और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को नजदीक से समझेंगे. साथ ही संबंधित नियमों, विनियमों और रक्षी फाइलों के संधारण की प्रक्रिया से भी परिचित होंगे.
- तीसरा चरण संस्थानगत प्रशिक्षण का होगा. इसमें ऑफिस मैनेजमेंट, रूल्स ओरियेंटेशन, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट, जूरिसप्रूडेंस, बिहेवियरल और एथिकल इश्यू, लीडरशिप, कम्युनिकेशन, ई-ऑफिस, ई-गवर्नेंस, पीपीपी मॉड्यूल, बेसिक कंप्यूटर, एमएस ऑफिस, इंटरनेट, ऑनलाइन बिल तैयारी, एचआरएमएस मॉड्यूल, फाइल ट्रैकिंग सिस्टम और आई गोट कर्मयोगी जैसे विषय शामिल किए गए हैं.
सेवाकालीन प्रशिक्षण पर जोर
नई व्यवस्था में छह से आठ वर्षों में एक बार दो सप्ताह का सेवाकालीन प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है. इसका उद्देश्य अनुभवात्मक प्रशिक्षण के जरिए नई दक्षताओं का विकास करना, समस्या समाधान और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना और ज्ञान को अद्यतन रखना है. इस प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान द्वारा प्रशासी विभाग के सहयोग से तैयार किया जाएगा.
पदोन्नति के बाद अलग प्रशिक्षण
प्रत्येक स्तर पर पदोन्नति के तुरंत बाद तीन से पांच दिनों का विशेष प्रशिक्षण भी अनिवार्य किया गया है. इस प्रशिक्षण के माध्यम से पदाधिकारियों को नई भूमिका और जिम्मेदारियों से परिचित कराया जाएगा. इसमें नेतृत्व विकास, तनाव प्रबंधन, सार्वजनिक शासन में नैतिकता और मूल्य, सुशासन, नीतिगत विषयों के नए विकास, सरकारी योजनाएं, प्रशासनिक कानून, परियोजना प्रबंधन और ई-गवर्नेंस जैसे विषय शामिल होंगे.
कामकाज की बढ़ेगी गति
राज्य सरकार का यह फैसला संकेत देता है कि झारखंड में प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक, तकनीक समर्थ और अधिक उत्तरदायी बनाने पर जोर दिया जा रहा है. लगातार बदलते शासन मॉडल और डिजिटल गवर्नेंस के दौर में सचिवालय सेवा के पदाधिकारियों का नियमित और चरणबद्ध प्रशिक्षण प्रशासनिक क्षमता को नई दिशा दे सकता है. यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे न केवल कामकाज की गति बढ़ेगी बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी पारदर्शिता और दक्षता आने की संभावना है.