Jharkhand: लगभग दस दिनों तक सरकार के उच्च स्तर पर गहन मंथन के बाद आखिरकार पेसा नियमावली को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई है। मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद मंत्रिमंडल समन्वय विभाग ने इसे पंचायती राज विभाग को वापस सौंप दिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ ही घंटों में पेसा नियमावली को अधिसूचना के जरिए लागू कर दिया जाएगा।
सरकार के भीतर हुई लंबी चर्चा के दौरान यह स्पष्ट निर्णय लिया गया कि झारखंड पंचायती राज अधिनियम (जेपीआरए) की मूल भावना से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसी निर्णय के तहत ग्राम सभा के नेतृत्व को पारंपरिक जनजातीय परंपराओं से जोड़ा गया है। अब वही व्यक्ति ग्राम सभा का प्रमुख बन सकेगा, जो रुढ़ीजन्य जनजातीय परंपराओं को मानता और उसका पालन करता हो। इससे ऐसे गैर-आदिवासी, जो इन परंपराओं से नहीं जुड़े हैं, उनके लिए ग्राम सभा का प्रमुख बनना कठिन हो जाएगा।
बताया जाता है कि कैबिनेट की बैठक के दौरान पंचायती राज विभाग द्वारा तैयार की गई नियमावली में सबसे अधिक मतभेद इसी बिंदु को लेकर सामने आए थे। यही कारण था कि 23 दिसंबर को कैबिनेट में अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बनने के बावजूद नियमावली को तत्काल अधिसूचित नहीं किया जा सका। मंत्रियों के सुझावों पर दोबारा विचार करने के बाद सरकार ने इसे बिना किसी बड़े बदलाव के मूल स्वरूप में ही मंजूरी देने का अंतिम फैसला किया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार नियमावली में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत केवल राजस्व ग्राम में रहने वाले लोग ही ग्राम सभा के सदस्य माने जाएंगे। पहले एक ही राजस्व ग्राम में एक से अधिक ग्राम सभा बनाने का प्रस्ताव था, जिसे अब हटा दिया गया है। इसके साथ ही संभावित विवादों को ध्यान में रखते हुए प्रखंड स्तर पर एक समिति के गठन का निर्णय लिया गया है, जो ग्राम सभा के परिसीमन से जुड़े विवादों का समाधान करेगी। सरकार को आशंका है कि परिसीमन को लेकर स्थानीय स्तर पर मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं। इसके अलावा नियमावली के अन्य प्रावधानों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
पेसा नियमावली के प्रमुख बिंदु
ग्राम सभा को सर्वोच्च इकाई का दर्जा
अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को स्वशासन की सबसे सशक्त इकाई माना गया है। इसमें गांव के सभी वयस्क सदस्य शामिल होंगे।
छोटे आपराधिक मामलों की सुनवाई
घर या मवेशी चोरी, हल्की मारपीट और भूमि से जुड़े मामूली विवादों जैसे मामलों में ग्राम सभा सुनवाई कर सकेगी और अधिकतम दो हजार रुपये तक का जुर्माना लगा सकेगी।
गिरफ्तारी और जमानत से जुड़े अधिकार
ग्राम सभा को क्षमादान का अधिकार होगा। पुलिस को किसी भी गिरफ्तारी के लिए ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी या फिर 48 घंटे के भीतर इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा।
शराब बिक्री पर नियंत्रण
शराब की दुकान खोलने के लिए ग्राम सभा की स्वीकृति आवश्यक होगी, जिससे गांव स्तर पर शराब के कारोबार पर नियंत्रण संभव होगा।
बैठक और कोरम की व्यवस्था
ग्राम सभा की बैठक के लिए कम से कम एक-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति जरूरी होगी। यदि किसी मुद्दे पर सर्वसम्मति नहीं बनती है तो 50 प्रतिशत से अधिक सदस्यों का समर्थन अनिवार्य होगा।
प्राकृतिक संसाधनों पर निर्णय का अधिकार
एक एकड़ से कम क्षेत्रफल वाले जल स्रोतों में मछली पालन और उनके उपयोग से संबंधित निर्णय ग्राम सभा करेगी। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में भी उसकी भूमिका तय की गई है।
शैक्षणिक और प्रशासनिक निगरानी
ग्राम सभा स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन, शिक्षकों व कर्मचारियों की उपस्थिति पर नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा कर सकेगी।
जनजातीय परंपराओं का संरक्षण
स्थानीय जनजातीय रीति-रिवाजों, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना ग्राम सभा के प्रमुख दायित्वों में शामिल किया गया है।
बालू घाटों पर अधिकार
ग्रेड-वन बालू घाटों का नियंत्रण ग्राम सभा के पास रहेगा। ग्राम सभा अपने सदस्यों की जरूरत के अनुसार बालू उपलब्ध कराएगी या निर्धारित दर पर उसका विक्रय करेगी। वहीं ग्रेड-टू बालू घाटों की नीलामी के लिए भी ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होगी।