झारखंड सरकार द्वारा पिछले महीने( 23 दिसंबर, 2025) को कैबिनेट से पारित पेसा कानून को, 2 जनवरी , 2026 की तिथि से राज्य में लागू करने से संबंधित अधिसूचना जारी कर दिया गया है।
आत्मा को ही कुचलने का काम
पेसा नियमावली से संबंधित अधिसूचना जारी होते ही, झारखंड राज्य के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे अमर कुमार बाउरी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और आदिवासी समाज के साथ छल करने का स्पष्ट प्रयास प्रतीत होता है। सरकार ने इस कानून की आत्मा को ही कुचलने का काम किया है।
आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ अन्याय
सरकार ने रूढ़िवादी जनजातीय परंपराओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया है, जिसके कारण ऐसे लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है, जिनका इस वर्ग से कोई संबंध नहीं है। यह आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ अन्याय है।
लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष जारी रहेगा
वन उपज, खनिज संसाधन एवं जल स्रोतों पर ग्राम सभा को नियंत्रण देने के बजाय सरकार और जिला अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण अधिकार अपने पास ही सुरक्षित रखे हैं। यह ग्राम सभा की संवैधानिक शक्तियों को सीधे-सीधे कुंठित करने का प्रयास है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष जारी रहेगा।