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  • 2026-01-03

Jharkhand Politics: 18वीं लोकसभा में सवाल पूछने में विद्युत वरण महतो सबसे आगे, अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ ने नहीं पूछा कोई सवाल

Jharkhand Politics: 18वीं लोकसभा में झारखंड से चुने गए 14 सांसदों की संसदीय गतिविधियों के आंकड़े सामने आए हैं. अब तक झारखंड के सांसदों ने कुल 1111 सवाल सदन में पूछे हैं. इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी एनडीए सांसदों की रही है, जिन्होंने 938 सवाल उठाए. वहीं इंडिया गठबंधन के सांसदों की ओर से 173 सवाल पूछे गए हैं.

  • सवाल पूछने के मामले में झारखंड से बीजेपी सांसद विद्युत वरण महतो सबसे आगे हैं. उन्होंने अब तक संसद में 207 सवाल पूछे हैं. 
  • दूसरे स्थान पर निशिकांत दूबे रहे हैं, जिन्होंने 160 सवाल उठाए. तीसरे नंबर पर मनीष जायसवाल हैं, जिनके नाम 157 सवाल दर्ज हैं. 
  • इसके बाद बीडी राम ने 148 सवाल पूछे हैं. अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के कारण सवाल और डिबेट में हिस्सा नहीं ले सके हैं.
  • संसद में डिबेट में भागीदारी के मामले में निशिकांत दूबे सबसे आगे नजर आए हैं. उन्होंने अब तक 52 बार सदन की बहसों में हिस्सा लिया है. 
  • विद्युत वरण महतो ने 30 बार डिबेट में भाग लिया है. बीडी राम ने 28 और मनीष जायसवाल ने 26 डिबेट में अपनी भागीदारी दर्ज कराई है.
  • आंकड़ों के अनुसार अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ की ओर से न तो डिबेट में भागीदारी हुई है और न ही सवाल पूछे गए हैं. 
  • सीपी चौधरी ने 15 डिबेट में हिस्सा लेते हुए 86 सवाल पूछे हैं. ढुल्लू महतो ने 21 डिबेट और 135 सवाल किए हैं. 
  • कालीचरण सिंह ने 45 सवाल पूछे हैं लेकिन डिबेट में हिस्सा नहीं लिया है. जोबा मांझी ने 4 डिबेट में भाग लेते हुए 25 सवाल पूछे हैं. 
  • कालीचरण मुंडा ने 13 डिबेट में हिस्सा लिया लेकिन केवल 2 सवाल पूछे. नलिन सोरेन ने 2 डिबेट और 62 सवाल पूछे हैं. 
  • सुखदेव भगत ने 11 डिबेट और 58 सवाल उठाए हैं. विजय हांसदा ने 8 डिबेट में हिस्सा लेते हुए 26 सवाल पूछे हैं.

कई प्रतिनिधियों की सीमित मौजूदगी खड़े करती है सवाल
झारखंड के सांसदों के प्रदर्शन के आंकड़े यह दिखाते हैं कि संसद में सवाल और बहस के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाने में एनडीए सांसद आगे रहे हैं. कुछ सांसदों की लगातार भागीदारी उनकी संसदीय सक्रियता को दर्शाती है, जबकि कई प्रतिनिधियों की सीमित मौजूदगी सवाल भी खड़े करती है. ये आंकड़े आने वाले समय में जनता के बीच सांसदों के कामकाज के आकलन का आधार बन सकते हैं.
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