Adityapur: आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को लेकर जुडको और जिंदल एजेंसी के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। सीतारामपुर स्थित 30 MLD वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से 15 जुलाई 2026 तक नियमित जलापूर्ति शुरू करने का दावा तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका। इसे लेकर जन कल्याण मोर्चा और आदित्यपुर अधिवक्ता संघ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे आम लोगों के साथ वादाखिलाफी बताया है।
मरम्मत के नाम पर सड़कों को नुकसान पहुंचाने का आरोप
जन कल्याण मोर्चा के अध्यक्ष अधिवक्ता ओम प्रकाश और आदित्यपुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दीपेन्द्र नाथ ओझा ने संयुक्त बयान में कहा कि कॉलोनी क्षेत्रों में फिलहाल केवल पाइपलाइन के फॉल्ट तलाशने और मरम्मत का कार्य चल रहा है। उनका आरोप है कि इस दौरान जिंदल एजेंसी ने कई पक्की सड़कों को खोदकर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए मांग की कि जिन सड़कों को तोड़ा गया है, उन्हें पहले जैसी गुणवत्ता और स्वरूप में जल्द बहाल किया जाए।
वायरल ऑडियो से बढ़ा भ्रम, स्पष्टीकरण की मांग
इसी बीच क्षेत्र में एक ऑडियो संदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि नई जलापूर्ति योजना के तहत पाइपलाइन और जल टंकियों की टेस्टिंग के दौरान सीतारामपुर डैम से बिना ट्रीटमेंट का पानी आपूर्ति किया जा रहा है, इसलिए इसका उपयोग पीने या खाना बनाने में नहीं किया जाए। इस वायरल संदेश पर अधिवक्ता ओम प्रकाश ने कहा कि इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि जिंदल एजेंसी के माध्यम से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए, ताकि अफवाहों पर रोक लग सके।
प्रशासन की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
नगर निगम के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह ने जिंदल एजेंसी द्वारा की जा रही वॉटर टेस्टिंग को "ढकोसला" और "आई वाश" करार दिया। उनका कहना है कि यदि पानी की गुणवत्ता की वास्तविक जांच करनी है तो नमूना सीधे वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से लिया जाना चाहिए, न कि केवल वितरण व्यवस्था के परीक्षण के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए। जलापूर्ति में देरी, क्षतिग्रस्त सड़कों और वायरल ऑडियो को लेकर उठे विवाद के बीच नगर निगम प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों के बीच पेयजल आपूर्ति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।