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  • 2026-05-15

Bengal Politics: ममता बनर्जी की वकालत पर उठे सवाल, बार काउंसिल ने 48 घंटे में मांगी पूरी रिपोर्ट

Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का केंद्र बन गई हैं. विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने को लेकर सुर्खियां बटोरी थीं और अब कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील की ड्रेस पहनकर पेश होने के मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. इस पूरे मामले पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने गंभीर रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है
हाई कोर्ट में वकील के गाउन में पहुंचीं ममता बनर्जी
हाल ही में ममता बनर्जी कलकत्ता हाई कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान वकील का गाउन पहनकर पहुंचीं थीं. वह बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा और टीएमसी कार्यालयों पर हमलों से जुड़े मामले में अपना पक्ष रख रही थीं. कोर्ट में उनकी मौजूदगी और वकील की पोशाक पहनने की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया. इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से उनके वकालत से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे हैं.

बार काउंसिल ने मांगी रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस की पूरी जानकारी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम Bengal बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि ममता बनर्जी के एनरोलमेंट, प्रैक्टिस की स्थिति, निलंबन और दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने से जुड़े सभी दस्तावेज और जानकारी दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए. काउंसिल ने खास तौर पर 2011 से 2026 तक की अवधि की जानकारी मांगी है. इसी दौरान ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं. बार काउंसिल यह जानना चाहती है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए उनकी वकालत की स्थिति क्या थी और क्या उनका बार लाइसेंस सक्रिय था या नहीं.

संवैधानिक पद पर रहते हुए वकालत को लेकर उठे सवाल
कानूनी परंपरा और प्रचलित नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति यदि किसी संवैधानिक या लाभ के पद पर कार्य कर रहा हो तो उसे अपने बार लाइसेंस को निलंबित करवाना पड़ता है. बाद में दोबारा सक्रिय रूप से वकालत शुरू करने के लिए उसे लाइसेंस फिर से एक्टिव कराना होता है. इसी नियम को आधार बनाकर अब ममता बनर्जी की कोर्ट में उपस्थिति और वकील के तौर पर पेश होने पर सवाल उठ रहे हैं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया यह स्पष्ट करना चाहती है कि उस दौरान उनकी कानूनी स्थिति क्या थी और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव ने लिखा पत्र
यह पत्र बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव श्रीरामंतो सेन की ओर से भेजा गया है. पत्र में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि ममता बनर्जी कोर्ट में वकील का गाउन पहनकर पेश हुईं. इसी के आधार पर परिषद ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है. पत्र में यह भी कहा गया है कि फिलहाल परिषद इस बात पर कोई राय नहीं दे रही है कि ऐसी उपस्थिति नियमों के तहत सही थी या नहीं. लेकिन रिकॉर्ड के आधार पर उनके रजिस्ट्रेशन, प्रैक्टिस और निलंबन की स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है.

राजनीतिक गलियारों में भी तेज हुई चर्चा
इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों क्षेत्रों में बहस शुरू हो गई है. विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं टीएमसी समर्थक इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बता रहे हैं.

अब सबकी नजर पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की उस रिपोर्ट पर टिकी है जिसे अगले 48 घंटों के भीतर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सौंपा जाना है. माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे और बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है.
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