Coal Price: Coal India Limited ने प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने के बावजूद कोयले की बिक्री कीमतें नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी का साफ उद्देश्य बिजली और उद्योगों को ईंधन की अचानक बढ़ती कीमतों से बचाना है। इससे बिजली उत्पादन की लागत स्थिर रहेगी और आम लोगों के बिजली बिल पर भी अप्रत्यक्ष राहत मिलेगी।
बढ़ती लागत का बोझ खुद उठा रही कंपनी
कंपनी इनपुट कॉस्ट में तेजी से हो रही बढ़ोतरी का बोझ खुद कंपनी उठा रही है। खासकर West Asia में जारी संघर्ष के कारण डीजल और विस्फोटक जैसे जरूरी संसाधनों की कीमतें बढ़ी हैं। इसके बावजूद कंपनी ने यह बोझ उपभोक्ताओं पर न डालने का निर्णय लिया है, ताकि अन्य सेक्टरों पर नकारात्मक असर न पड़े।
विस्फोटक और डीजल की कीमतों में तेज उछाल
अमोनियम नाइट्रेज जो ओपनकास्ट माइनिंग में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों का बड़ा हिस्सा है, की कीमत 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। इससे विस्फोटकों की औसत लागत भी करीब 26 प्रतिशत बढ़ गई। वहीं डीजल की कीमत 92 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गई, जिससे उत्पादन लागत पर भारी दबाव बना है।
ठेकेदारों को भी राहत, कंपनी का सहयोग
CIL अपनी खदानों में काम करने वाले ठेकेदारों को भी बढ़ी हुई डीजल कीमतों की भरपाई कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने करीब 4.19 लाख किलोलीटर डीजल का उपयोग किया। इसके बावजूद कंपनी यह सुनिश्चित कर रही है कि उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित न हो।
बाजार में स्थिरता के लिए रणनीतिक कदम
कोयले को किफायती बनाए रखने के लिए कंपनी ने ई-नीलामी में रिजर्व प्राइस कम किया है, नीलामी की आवृत्ति बढ़ाई है और बाजार में अधिक कोयला उपलब्ध कराया है। इन कदमों का मकसद ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कीमतों को स्थिर रखना और देश के उपभोक्ताओं को राहत देना है।
बढ़ती लागत का बोझ खुद उठा रही कंपनी
कंपनी इनपुट कॉस्ट में तेजी से हो रही बढ़ोतरी का बोझ खुद कंपनी उठा रही है। खासकर West Asia में जारी संघर्ष के कारण डीजल और विस्फोटक जैसे जरूरी संसाधनों की कीमतें बढ़ी हैं। इसके बावजूद कंपनी ने यह बोझ उपभोक्ताओं पर न डालने का निर्णय लिया है, ताकि अन्य सेक्टरों पर नकारात्मक असर न पड़े।
विस्फोटक और डीजल की कीमतों में तेज उछाल
अमोनियम नाइट्रेज जो ओपनकास्ट माइनिंग में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों का बड़ा हिस्सा है, की कीमत 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। इससे विस्फोटकों की औसत लागत भी करीब 26 प्रतिशत बढ़ गई। वहीं डीजल की कीमत 92 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गई, जिससे उत्पादन लागत पर भारी दबाव बना है।
ठेकेदारों को भी राहत, कंपनी का सहयोग
CIL अपनी खदानों में काम करने वाले ठेकेदारों को भी बढ़ी हुई डीजल कीमतों की भरपाई कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने करीब 4.19 लाख किलोलीटर डीजल का उपयोग किया। इसके बावजूद कंपनी यह सुनिश्चित कर रही है कि उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित न हो।
बाजार में स्थिरता के लिए रणनीतिक कदम
कोयले को किफायती बनाए रखने के लिए कंपनी ने ई-नीलामी में रिजर्व प्राइस कम किया है, नीलामी की आवृत्ति बढ़ाई है और बाजार में अधिक कोयला उपलब्ध कराया है। इन कदमों का मकसद ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कीमतों को स्थिर रखना और देश के उपभोक्ताओं को राहत देना है।