Garhwa: गढ़वा जिले के हसनदाग गांव में एक शादी समारोह खुशियों से शुरू होकर तनाव में बदल गया। रात भर हंसी-खुशी से चली शादी की सभी रस्में, यहां तक कि सिंदूरदान भी, शांति से संपन्न हो गईं। लेकिन अगली सुबह हालात ने अचानक करवट ले ली, जब दुल्हन पक्ष ने विदाई से साफ मना कर दिया।
पलामू से आई थी बारात
बारात पलामू जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र स्थित सरहुआ गांव से आई थी। दूल्हे धनंजय चौधरी अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ तय कार्यक्रम के अनुसार हसनदाग पहुंचे थे।
दिव्यांगता के आरोप पर बढ़ा विवाद
सुबह जब दूल्हे पक्ष ने विदाई की तैयारी शुरू की, तभी दुल्हन के परिजनों ने दूल्हे के दिव्यांग होने का आरोप लगाते हुए बेटी को विदा करने से इनकार कर दिया। इस आरोप के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और दूल्हे सहित बारातियों को गांव में ही रोक लिया गया।
बताया जाता है कि करीब 12 घंटे तक दूल्हा और बारात में शामिल लोग गांव से बाहर नहीं जा सके।
सामाजिक पंचायत ने कराया समझौता
स्थिति बिगड़ती देख गांव के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप किया। सामाजिक पंचायत बुलाई गई, जहां दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत चली। आखिरकार आपसी सहमति से यह तय हुआ कि शादी में हुए खर्च का बंटवारा किया जाएगा और दूल्हे पक्ष द्वारा दिया गया दहेज का सामान लौटा दिया जाएगा।
समझौते के बाद बारातियों को वापस जाने की अनुमति दे दी गई। हालांकि, दूल्हा बिना दुल्हन के ही अपने घर लौट गया।
दूल्हे के पिता ने जताई नाराजगी
दूल्हे के पिता दिनेश चौधरी ने कहा कि विवाह पूरी सहमति और जानकारी के साथ तय हुआ था। उनका आरोप है कि सभी रस्में पूरी होने के बाद अचानक दिव्यांगता का मुद्दा उठाना अनुचित है। उन्होंने कहा कि इस घटना से दोनों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और सामाजिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर रही है।