Indian Rupee Crash: भारतीय करेंसी के लिए गुरुवार का दिन बेहद अहम और चिंताजनक रहा, जब रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के पार पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 95.01 पर खुला और गिरकर 95.27 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले बुधवार को यह 94.88 और मंगलवार को 94.68 पर बंद हुआ था। लगातार गिरावट से यह साफ है कि रुपया दबाव में है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
कच्चे तेल की आग ने बढ़ाया दबाव, वैश्विक संकट का असर
रुपये की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 120 से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो कई सालों का उच्चतम स्तर है। मध्य-पूर्व में तनाव और सप्लाई बाधित होने से तेल महंगा हुआ है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश को ज्यादा डॉलर खर्च करना पड़ रहा है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपया कमजोर होता जा रहा है
मजबूत डॉलर और सख्त नीति का असर, निवेशकों की निकासी जारी
अमेरिकी केंद्रीय बैंक US Federal Reserve के सख्त रुख और ब्याज दरों पर स्थिरता के संकेतों से डॉलर मजबूत हुआ है। इसका सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। इस साल अब तक रुपया करीब 5.8 फीसदी कमजोर हो चुका है, जिससे यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है। साथ ही विदेशी निवेशकों की निकासी ने भी डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
आम जनता पर असर, RBI के सामने बड़ी चुनौती
रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। आयातित सामान- जैसे पेट्रोल, डीज़ल, इलेक्ट्रॉनिक्स- महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है। ऐसे में Reserve Bank of India की भूमिका बेहद अहम हो जाती है, जो बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को संभालने की कोशिश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो रुपया 96 या उससे आगे भी जा सकता है।