Jamshedpur: जमशेदपुर के मानगो नगर निगम में महापौर पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब नगर निगम की राजनीति का केंद्र उपमहापौर का चुनाव बन गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार उपमहापौर का चुनाव 17 मार्च को कराया जाएगा। चुनाव की तारीख तय होते ही विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है और वार्ड पार्षदों के बीच समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
महापौर बनने के बाद उपमेयर पद पर टिकी नजरें
मानगो नगर निगम में महापौर के रूप में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता पदभार ग्रहण कर चुकी हैं। इसके बाद अब नगर निगम की राजनीति का अगला अहम पड़ाव उपमहापौर का चुनाव माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि उपमेयर के जरिए निगम की राजनीति में प्रभाव बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
एनडीए और भाजपा की रणनीति
महापौर पद का चुनाव हारने के बाद भाजपा और जदयू समेत एनडीए गठबंधन अब उपमहापौर पद पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। माना जा रहा है कि गठबंधन अपने समर्थित उम्मीदवार को मैदान में उतार सकता है।
इसका उद्देश्य निगम में संतुलन बनाए रखना और मेयर के कामकाज पर राजनीतिक दबाव बनाए रखना भी माना जा रहा है।
सरयू राय की प्रतिष्ठा भी दांव पर
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी कोशिश होगी कि उनके समर्थक वार्ड पार्षदों में से कोई उपमेयर बने।
इसी कारण उनकी टीम भी पार्षदों से संपर्क साधने और समर्थन जुटाने में सक्रिय हो गई है।
कांग्रेस और समर्थक पार्षदों की रणनीति
नगर निगम में इस बार मुस्लिम समुदाय से आने वाले वार्ड पार्षदों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि वे कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस भी जल्द ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है।
बन्ना गुप्ता की सक्रियता
पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता भी इस चुनाव को लेकर सक्रिय बताए जा रहे हैं। उनकी कोशिश होगी कि उनके समर्थक या करीबी पार्षद को उपमहापौर पद पर जीत दिलाई जाए, ताकि निगम के कामकाज में बेहतर तालमेल बना रहे।
निर्दलीय और अन्य नेताओं की भी सक्रियता
राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस से निष्कासित नेता फिरोज खान और जेबा खान भी अपने समर्थकों के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
अंकगणित और जोड़-तोड़ का खेल
उपमहापौर का चुनाव पूरी तरह पार्षदों के वोट पर निर्भर करेगा। चुने गए 34 वार्ड पार्षदों में से ही कोई उम्मीदवार बन सकता है और वही पार्षद मतदान करेंगे।
ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच समर्थन जुटाने का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अंतिम समय तक पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए बैठकें और बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा।
पार्षदों की बैठक और लॉबिंग शुरू
चुनाव की तारीख नजदीक आते ही संभावित उम्मीदवारों और बड़े नेताओं के घरों पर बैठकें होने लगी हैं। बताया जा रहा है कि पार्षदों को अपने पक्ष में लाने के लिए लगातार संपर्क और रणनीतिक चर्चाएं की जा रही हैं।