Jamshedpur News : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि पहले पहाड़ और नदियों को बचाना जरूरी है, उसके बाद विकास की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान विकास मॉडल विनाश की ओर ले जा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की जरूरत है। उन्होंने “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” के बजाय “सनातन विकास” मॉडल अपनाने की वकालत की।
साकची स्थित मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी पर्वत सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सरयू राय ने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जो “चरैवेति-चरैवेति” के सिद्धांत पर लगातार चलता रहे और प्रकृति के संतुलन को नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने कहा कि सनातन विकास का अर्थ है “नित्य नूतन, चिर पुरातन”, यानी ऐसा विकास जो पुरानी परंपराओं और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखते हुए आगे बढ़े।
कानून होने के बावजूद लागू नहीं हो रहे नियम, जनता को चाहिए नया हथियार
सरयू राय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि कई बार कानून की मूल भावना के विपरीत उनका इस्तेमाल किया जाता है, जो बड़ी विडंबना है।
उन्होंने कहा कि नया कानून बनने से जनता को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का एक और मजबूत आधार मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिससे पहाड़, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो।
सम्मेलन के दौरान उनकी नई पुस्तक चेंजिंग फेस ऑफ सारंडा और स्मारिका का भी विमोचन किया गया। पुस्तक में सारंडा क्षेत्र में हुए परिवर्तनों का उल्लेख किया गया है।
जलपुरुष राजेंद्र सिंह बोले- “माई कहकर कमाई करेंगे तो न नदी बचेगी, न पहाड़”
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मैग्सेसे पुरस्कार विजेता जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि नदियों और पहाड़ों को केवल आर्थिक संसाधन मानना गलत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान विकास मॉडल प्रकृति और संस्कृति दोनों को नुकसान पहुंचा रहा है।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि जमशेदपुर घोषणा पत्र जारी कर दिया गया है और अब इसे जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से गांव, पंचायत, शिक्षण संस्थानों और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस कानून को लागू कराने के लिए देशव्यापी माहौल तैयार करना होगा।
सम्मेलन में जारी हुआ जमशेदपुर घोषणा पत्र, पर्वत संरक्षण कानून की मांग
दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी पर्वत सम्मेलन के अंतिम दिन “जमशेदपुर घोषणा पत्र” जारी किया गया। इसमें पर्वतीय और नदी पारितंत्रों के संरक्षण, जल सुरक्षा, जैव विविधता और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए।
घोषणा पत्र में पर्वत संरक्षण के लिए समग्र कानूनी ढांचा तैयार करने, नदियों और पहाड़ों के अधिकार सुनिश्चित करने तथा एक वर्ष के भीतर “पर्वत संरक्षण अधिनियम” का प्रारूप तैयार करने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन में यह भी मांग उठी कि अवैध खनन और ब्लास्टिंग पर सख्त रोक लगाई जाए तथा रिवर बेसिन प्रोटेक्शन को कानूनी आधार दिया जाए।
सम्मेलन का आयोजन तरुण भारत संघ, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, जल बिरादरी, युगांतर भारती, नेचर फाउंडेशन और अन्य संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।