Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-05-01

Jharkhand News: खूंटी में नाबालिग की बेरहमी से पिटाई पर मानवाधिकार आयोग सख्त, मुआवजे और FIR का आदेश

Jharkhand News: झारखंड के खूंटी जिले से पुलिसिया बर्बरता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां मानव तस्करी के संदिग्ध की तलाश में गई पुलिस ने उसके 16 वर्षीय नाबालिग बेटे, शिवा कुमार सिंह, को निशाना बनाया. 16 फरवरी 2025 को कोसंबी गांव में छापेमारी के दौरान जब संदिग्ध घर पर नहीं मिला, तो पुलिस ने न केवल तोड़फोड़ की, बल्कि नाबालिग को जबरन उठाकर महिला थाने ले आई. आरोप है कि खूंटी महिला थाने के सब-इंस्पेक्टर संतोष रजक ने पिता का पता उगलवाने के लिए बच्चे की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि वह चलने और बैठने की स्थिति में भी नहीं रहा.

NHRC का कड़ा रुख: एक लाख रुपये मुआवजे का अल्टीमेटम
चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के सचिव बैद्यनाथ कुमार की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने झारखंड सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पीड़ित बच्चे को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. हालांकि सरकार ने मुआवजे की राशि को मंजूरी दे दी है, लेकिन आयोग ने दोषी पुलिस अधिकारी पर अब तक आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज न होने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है और इसके लिए अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है.

मानवाधिकारों का हनन: जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन
सुनवाई के दौरान आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक नाबालिग को थाने लाकर पीटना भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम का खुला उल्लंघन है. आयोग ने स्पष्ट किया कि जिस बच्चे का केस से कोई लेना-देना नहीं था, उसे प्रताड़ित करना उसके जीवन के अधिकार और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का हनन है. दोषी अधिकारी संतोष रजक और अन्य संलिप्त लोगों पर अब कानूनी फंदा कसना तय माना जा रहा है.

प्रशासन की जवाबदेही और अगली कार्रवाई
झारखंड सरकार ने आयोग को सूचित किया है कि उन्होंने मुआवजे की राशि को मंजूरी दे दी है और जल्द ही इसे पीड़ित परिवार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा. हालांकि, आयोग का मुख्य जोर अब दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर है. यह मामला राज्य में पुलिस की कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों के संरक्षण के प्रति शासन की जवाबदेही को एक बार फिर से सुर्खियों में ले आया है.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !