Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-06-26

Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 30 साल पुराने हत्या मामले में दोषी आरोपी बरी

Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट ने लगभग तीन दशक पुराने एक हत्या मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी मनसु मांझी उर्फ मानसा मांझी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संदेहजनक और विरोधाभासी गवाहियों के आधार पर किसी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद बोकारो की निचली अदालत द्वारा वर्ष 1999 में दी गई दोषसिद्धि और 2000 में सुनाई गई उम्रकैद की सजा के आदेश को रद्द कर दिया।

1996 के मामले से जुड़ा है विवाद
यह मामला वर्ष 1996 का है, जिसमें आरोप था कि मनसु मांझी और एक अन्य व्यक्ति ने चंद्रमणि मांझियान की हत्या ‘डायन’ होने के संदेह में कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने उस समय आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से एकमात्र कथित प्रत्यक्षदर्शी रूपलाल मांझी की गवाही पर आधारित था, लेकिन उसकी गवाही में कई विरोधाभास सामने आए। अदालत ने यह भी देखा कि सूचक और उसकी पत्नी के बयान मेल नहीं खाते, जिससे पूरी कहानी पर संदेह उत्पन्न होता है। इसके अलावा गवाही में यह भी असंगति पाई गई कि हमले में कभी कुल्हाड़ी तो कभी तलवार के उपयोग की बात कही गई, जिससे अभियोजन पक्ष की दलील कमजोर हो गई।

जांच अधिकारी की अनुपस्थिति बनी अहम कारण
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी को पेश नहीं किया गया, जिससे घटनास्थल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि नहीं हो सकी। इस कमी को अदालत ने आरोपी के खिलाफ गंभीर प्रक्रिया संबंधी पूर्वाग्रह माना। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि तभी संभव है जब आरोप संदेह से परे सिद्ध हों। यदि साक्ष्यों में स्पष्टता नहीं है और दो संभावित निष्कर्ष निकलते हैं, तो न्याय के सिद्धांत के अनुसार आरोपी को लाभ दिया जाना चाहिए।

आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया गया
सभी तथ्यों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके बाद ट्रायल कोर्ट का निर्णय रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया गया। चूंकि आरोपी पहले से जमानत पर था, उसे जमानत बांड की जिम्मेदारी से भी मुक्त कर दिया गया।



WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !