Jharkhand News: नवीन केडिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने 30 अप्रैल 2026 को उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि ACB सुनवाई के दौरान यह साबित करने में असफल रही कि केडिया छत्तीसगढ़ डिसटिलरी के निदेशक थे, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली।
शराब घोटाले में गिरफ्तारी, ACB के आरोप कमजोर पड़े
शराब घोटाले की जांच के दौरान ACB ने नवीन केडिया को गिरफ्तार किया था और उन पर छत्तीसगढ़ डिसटिलरी का निदेशक होने का आरोप लगाया था। ACB का दावा था कि इस कंपनी के जरिए झारखंड में निम्न गुणवत्ता वाली शराब की आपूर्ति की गई, जिसमें केडिया की भूमिका संदिग्ध है।
ओम साईं बिवरेजेज और सप्लाई चेन पर सवाल
मामले में सामने आया कि झारखंड में थोक शराब की आपूर्ति का काम ओम साईं बिवरेजेज को दिया गया था। आरोप है कि इसी कंपनी के माध्यम से रद्दी किस्म की शराब की आपूर्ति हुई, जिसे छत्तीसगढ़ डिसटिलरी से भेजा जाता था। ACB ने इसी आधार पर केडिया को भी दोषी ठहराने की कोशिश की।
बचाव पक्ष की दलीलें बनीं आधार, आरोप साबित नहीं
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि नवीन केडिया केवल सीमित अवधि के लिए ही कंपनी के निदेशक रहे थे- पहली बार 2009 से 2010 तक और दूसरी बार 2024 से 2025 तक। जबकि ACB के आरोप 2022 से जुड़े हैं। अदालत ने पाया कि ACB आरोपों को साबित करने में विफल रही, जिसके चलते केडिया को जमानत दे दी गई।