Jharkhand News: बारिश और बढ़ती उमस के बीच झारखंड में सर्पदंश की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है. हालात को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए नई गाइडलाइन लागू की है. विभाग ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग की श्रेणी में रखते हुए हर मामले की अनिवार्य रिपोर्टिंग का निर्देश दिया है.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी जिलों में नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए. अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि संदिग्ध और पुष्ट दोनों तरह के मामलों का रिकॉर्ड नियमित रूप से तैयार किया जाए.
आंकड़ों के अनुसार राज्य में सर्पदंश के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है. वर्ष 2022 में जहां 392 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 4078 तक पहुंच गई. इस दौरान 26 लोगों की मौत भी दर्ज की गई. वर्ष 2026 में अप्रैल तक ही 561 मामले सामने आ चुके हैं.
विभाग का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई लोग सांप काटने के बाद अस्पताल जाने की बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक तरीकों का सहारा लेते हैं, जिससे इलाज में देरी होती है और स्थिति गंभीर बन जाती है. लोगों को जागरूक करने के लिए एएनएम, सहिया और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को गांव स्तर पर अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है.
राज्य के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम सीरम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने का आदेश दिया गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में यह दवा मरीजों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी.
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश होने पर घाव काटने, जहर चूसने या प्रभावित अंग को ज्यादा कसकर बांधने जैसी गलतियां न करें. मरीज को शांत अवस्था में रखते हुए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं और आवश्यकता पड़ने पर 108 एंबुलेंस सेवा की मदद लें.