KVIC Scam Ranchi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रांची जोनल कार्यालय ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) में हुए 3.89 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है. ED ने 24 मार्च को इस मामले के मुख्य आरोपी और केवीआईसी रांची के तत्कालीन कार्यकारी सुनील कुमार समेत 6 लोगों के खिलाफ पीएमएलए कोर्ट में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल कर दी है. जांच में खुलासा हुआ कि सुनील कुमार ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर एक फर्जी कंपनी बनाई थी, जो नकली “कॉरपोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर” (CIN) पर संचालित हो रही थी.
रिश्तेदारों के खातों का “मनी लॉन्ड्रिंग” के लिए हुआ इस्तेमाल
घोटाले की परतें खोलते हुए ED ने बताया कि खादी रिफॉर्म एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम (KRDP) के तहत मिले करोड़ों रुपये बिना किसी काम के सीधे निजी खातों में ट्रांसफर किए गए. सुनील कुमार के रिश्तेदारों ने इस साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई और अपने बैंक खाते व चेकबुक सौंप दिए ताकि पैसे की “लेयरिंग” की जा सके. इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकारी राशि को सफेद करने का सुनियोजित खेल खेला गया, जिसकी शुरुआत सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच द्वारा दर्ज प्राथमिकी से हुई थी.
ओरमांझी में खरीदी बेनामी संपत्ति, रजिस्ट्री में छिपाया असली दाम
जांच में यह भी सामने आया कि घोटाले की काली कमाई का बड़ा हिस्सा अचल संपत्तियों में निवेश किया गया. सुनील कुमार ने अपनी पत्नी के नाम पर रांची के ओरमांझी इलाके में जमीन खरीदी थी. धोखाधड़ी को छिपाने के लिए रजिस्ट्री के दौरान संपत्ति की सरकारी कीमत जानबूझकर कम दिखाई गई ताकि वास्तविक लेन-देन पर पर्दा डाला जा सके. ED ने पिछले साल सुनील कुमार के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी, जहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे.
71.91 लाख की संपत्ति कुर्क, 31 लाख रुपये हुए वापस
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अब तक कड़ी वित्तीय कार्रवाई की है. अप्रैल 2025 में करीब 71.91 लाख रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) किया गया था, जिसे अब कानूनी मंजूरी मिल चुकी है. इसके अलावा, “आश्रम कल्याण निधि न्यास” को भेजे गए 31.11 लाख रुपये भी ट्रस्ट द्वारा वापस कर ED के पास जमा करा दिए गए हैं. फिलहाल यह मामला विशेष पीएमएलए अदालत में विचाराधीन है और ED अन्य कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच जारी रखे हुए है.