शुरुआती कारोबार में ही दबाव, दो दिनों में 59 पैसे की गिरावट
मंगलवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.30 पर खुला, लेकिन जल्द ही गिरकर 95.43 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 20 पैसे की कमजोरी दर्शाता है. इससे पहले सोमवार को रुपया 39 पैसे गिरकर 95.23 पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का सबसे निचला स्तर था. इस तरह सिर्फ दो दिनों में ही रुपया 59 पैसे टूट चुका है और लगातार दबाव में बना हुआ है.
तीन हफ्तों में लगभग 3 रुपए की गिरावट, बाजार में असामान्य उतार चढ़ाव
पिछले करीब तीन हफ्तों में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 3 रुपए तक कमजोर हो चुका है. 17 अप्रैल को यह 92 के आसपास था, लेकिन अब 95.43 के स्तर तक पहुंच गया है. इतने कम समय में इतनी बड़ी गिरावट को असामान्य माना जा रहा है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह स्तर 96 से 97 के बीच भी जा सकता है.
भू राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर
रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है. निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है. इसके अलावा ब्रेंट क्रूड की कीमतें 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
डॉलर इंडेक्स में तेजी, विदेशी निवेशकों का रुख भी अहम
डॉलर इंडेक्स में भी मजबूती देखी जा रही है, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है. यह 0.15 प्रतिशत बढ़कर 98.51 पर ट्रेड कर रहा था. विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बेरुखी और तेल कंपनियों द्वारा डॉलर की बढ़ती मांग भी रुपये को कमजोर कर रही है.
विशेषज्ञों की राय, आगे भी बना रह सकता है दबाव
Finrex Treasury Advisors LLP के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, तेल की कीमतों में उछाल और सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव के कारण रुपये पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है. उनका मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी और भू राजनीतिक तनाव कम नहीं होगा, तब तक रुपये में कमजोरी जारी रह सकती है.
आरबीआई के हस्तक्षेप से मिल सकती है अस्थायी राहत
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में हस्तक्षेप करता है, तो रुपये को कुछ समय के लिए सहारा मिल सकता है. हालांकि यह राहत स्थायी नहीं होगी और वैश्विक परिस्थितियां फिर से दबाव बना सकती हैं.
शेयर बाजार पर भी असर, सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
रुपये की कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखा. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 361.62 अंक गिरकर 76,907.78 पर आ गया, जबकि निफ्टी 134.90 अंक गिरकर 23,980.60 पर पहुंच गया.
हालांकि एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 2,835.62 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.
रुपये की लगातार गिरावट केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक दबाव और अनिश्चितताओं का संकेत है. आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात, कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी.