National News: नए महीने के पहले दिन ही देशभर में ऐसे बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका असर हर घर और हर जेब पर पड़ेगा. कहीं सिगरेट और तंबाकू उत्पाद महंगे हो गए हैं तो कहीं फास्टैग की प्रक्रिया आसान कर दी गई है. इसके साथ ही गैस सिलेंडर, ब्याज दर, हवाई टिकट और संपत्ति रजिस्ट्री से जुड़े नियम भी बदल गए हैं.
सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स का बोझ
अब पान मसाला, खैनी और गुटखा जैसे तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगेगा. पहले इन पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ कंपन्सेशन सेस लगता था. सिगरेट पर उसकी लंबाई के आधार पर नई एक्साइज ड्यूटी भी लागू कर दी गई है, जो 2.05 रुपये से लेकर 8.5 रुपये प्रति स्टिक तक होगी. इसके ऊपर 40 प्रतिशत जीएसटी भी लगेगा. इस बदलाव से बाजार में सिगरेट और तंबाकू उत्पाद 15 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं.
फास्टैग के लिए अब KYV की बाध्यता खत्म
नई कार, जीप और वैन के लिए फास्टैग जारी करते समय अब “नो योर व्हीकल” प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी. जिन वाहनों पर पहले से फास्टैग लगा है, उनके लिए भी रूटीन KYV जरूरी नहीं रहेगा. अब सिर्फ शिकायत मिलने या गड़बड़ी की आशंका होने पर ही जांच की जाएगी.
कॉमर्शियल सिलेंडर फिर महंगा
19 किलो वाला कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 50 रुपये तक महंगा हो गया है. दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 1740.50 रुपये हो गई है, जबकि चेन्नई में यह अब 1899.50 रुपये में मिलेगा.
RBI की बैठक से EMI में राहत की उम्मीद
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 4 से 6 फरवरी तक होगी. माना जा रहा है कि इसमें रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो लोन सस्ते होंगे और ईएमआई घटेगी. पिछली बैठक में भी रेपो रेट 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत किया गया था.
एविएशन फ्यूल सस्ता, हवाई टिकट पर असर
तेल कंपनियों ने एविएशन फ्यूल के दाम करीब 1 हजार रुपये घटा दिए हैं. दिल्ली में इसकी कीमत अब 91,393.39 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है. इससे एयरलाइंस की लागत घटेगी और यात्रियों को टिकट सस्ते मिलने की संभावना है.
संपत्ति रजिस्ट्री में आधार अनिवार्य
उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में संपत्ति की खरीद बिक्री के लिए आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी कर दिया गया है. अब रजिस्ट्री के समय खरीदार, विक्रेता और गवाहों को बायोमेट्रिक पहचान देनी होगी. इसका उद्देश्य फर्जीवाड़े और बेनामी सौदों पर रोक लगाना है.
फरवरी की शुरुआत में लागू हुए ये बदलाव दिखाते हैं कि सरकार और नियामक संस्थाएं एक साथ कई मोर्चों पर सुधार और सख्ती दोनों कर रही हैं. जहां एक ओर टैक्स और महंगाई का असर दिखेगा, वहीं डिजिटल प्रक्रिया और ऊर्जा लागत में राहत से आम लोगों को कुछ सहूलियत भी मिल सकती है.