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  • 2026-02-01

Jharkhand News: दावोस और यूके दौरे का दिखा असर, झारखंड में जिंदल ग्रुप का 70 हजार करोड़ का निवेश प्रस्ताव

Jharkhand News: झारखंड सरकार के अंतरराष्ट्रीय प्रयास अब जमीन पर उतरते नजर आ रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में दावोस और यूके दौरे के दौरान हुए संवाद का पहला बड़ा परिणाम सामने आया है. जिंदल ग्रुप ने राज्य में चरणबद्ध तरीके से 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे झारखंड के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है.

पतरातू बनेगा स्टील हब
यूके में हुई बैठकों के बाद जिंदल समूह के प्रतिनिधियों ने निवेश से संबंधित लेटर ऑफ इंटेंट राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को औपचारिक रूप से सौंपा है. यह प्रस्ताव स्टील, परमाणु ऊर्जा और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिन्हें राज्य की औद्योगिक रीढ़ माना जा रहा है. निवेश प्रस्ताव का मुख्य केंद्र पतरातू में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला एकीकृत स्टील संयंत्र है. जिंदल स्टील इसे उन्नत और कम उत्सर्जन तकनीक के साथ विकसित करने की योजना बना रहा है. इस संयंत्र से संरचना, परिवहन, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता का स्टील तैयार किया जाएगा, जिससे झारखंड की भूमिका देश की विनिर्माण शृंखला में और मजबूत होगी.

स्वच्छ ऊर्जा पर भी फोकस
समूह की योजना में 140 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना भी शामिल है, जो औद्योगिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी. इसके साथ ही केंद्र सरकार की शांति नीति के तहत झारखंड में 1400 मेगावाट क्षमता की परमाणु विद्युत परियोजना के लिए भी निवेश का प्रस्ताव दिया गया है. यह परियोजना सभी वैधानिक और नियामक अनुमोदनों के अधीन होगी.

ऊर्जा सुरक्षा और डी-कार्बन लक्ष्य को समर्थन
यह निवेश देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक डी-कार्बनकरण और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को मजबूती देगा. कम कार्बन आधारित स्थिर बिजली आपूर्ति से उद्योगों को नई गति मिलने की संभावना है.

युवाओं के लिए रोजगार की राह
इन परियोजनाओं से लगभग 11 हजार प्रत्यक्ष और 50 हजार से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है. इससे एमएसएमई, सेवा क्षेत्र और स्थानीय उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी.

जिंदल ग्रुप का यह प्रस्ताव केवल एक निवेश समझौता नहीं बल्कि झारखंड के औद्योगिक भविष्य की रूपरेखा बदलने वाला कदम माना जा रहा है. यदि परियोजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं तो राज्य न केवल निवेश के नए केंद्र के रूप में उभरेगा बल्कि रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी मजबूत पहचान बना सकता है.
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