Navratri Day 4: नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे रूप, मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की सी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी और अंधकार को दूर किया था। इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि इनके आठ हाथ होते है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप
मां कूष्मांडा के आठ हाथ होते हैं, जिनमें वे कमंडल, धनुष, बाण, चक्र, गदा, कमल, अमृत कलश और जप माला धारण करती हैं। कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधेरा था, तब मां ने अपनी मुस्कान से सृष्टि को रोशनी दी।
मां के अंदर सूर्य जैसी तेज और ऊर्जा होती है।
मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ कपड़े पहनें।
फिर पूजा स्थान पर बैठकर मां कूष्मांडा का ध्यान करें।
उनके सामने घी का दीपक जलाएं।
मां को पीले फूल, फल, मिठाई, धूप-दीप और नैवेद्य चढ़ाएं।
भोग में मालपुआ चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। अगर मालपुआ नहीं है, तो आप पीली मिठाई या हलवा-पूरी भी चढ़ा सकते हैं।
अंत में मां की आरती करें और हाथ जोड़कर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगें।
इसके बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
मां को क्या भोग लगाएं
मां कूष्मांडा को पीले रंग की चीजें बहुत प्रिय होती हैं।
आप उन्हें केसर वाला पेठा, बताशे या मालपुआ चढ़ा सकते हैं।
माना जाता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर मां कूष्मांडा जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां दूर कर देती हैं और ऊर्जा व शक्ति देती हैं।