PESA Rules: झारखंड के सभी जिलों में पेसा (पंचायत उपबंध - अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) कानून की नियमावली को पूरी तरह लागू करने की तैयारी कर ली गई है, जिसके तहत ग्राम सभाओं को अब अभूतपूर्व और बेहद कड़क शक्तियां प्रदान की गई हैं. नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी ग्रामीण को कोई समस्या है तो वह लिखित या मौखिक तौर पर सीधे ग्राम सभा में शिकायत दर्ज करा सकेगा. शिकायत मिलने के ठीक आठ दिनों के भीतर मामले की सुनवाई की तारीख तय कर दी जाएगी. यह सुनवाई किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि अनिवार्य रूप से किसी सार्वजनिक स्थान पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और इलाके के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार ही आयोजित की जाएगी.
माझी, मुंडा, मानकी और पाहन का सहयोग अनिवार्य, जेल भेजने का हक नहीं
ग्राम सभा में होने वाली इन सुनवाइयों में इलाके के पारंपरिक नेतृत्व जैसे माझी, मुंडा, मानकी और पाहन का सहयोग लेना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है. ग्राम सभा को किसी भी दोषी व्यक्ति पर अधिकतम 2000 रुपये (दो हजार रुपये) तक का आर्थिक दंड लगाने, पश्चाताप कराने या सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना सुनाने का पूरा कानूनी अधिकार होगा. हालांकि, ग्राम सभा की शक्तियों की एक कड़क लक्ष्मण रेखा भी तय की गई है, वह किसी भी व्यक्ति को जेल की सजा नहीं सुना सकती. इसके अलावा, गंभीर प्रकृति के संगीन अपराधों (जैसे हत्या, डकैती आदि) की सुनवाई ग्राम सभा में वर्जित रहेगी और ऐसे मामलों को सीधे पुलिस के हवाले ही करना होगा.
अपील करने की भी होगी छूट, रूढ़िजन्य विधियों का होगा संरक्षण
यदि कोई पक्ष ग्राम सभा द्वारा सुनाए गए फैसले से कतई संतुष्ट नहीं है, तो वह उससे ऊपर की पारंपरिक व्यवस्था में गुहार लगा सकता है या फिर सीधे सक्षम न्यायालय (कोर्ट) में अपनी अपील दाखिल कर सकता है. पेसा नियमावली के तहत ग्राम सभा अपने क्षेत्र में निवास करने वाले आदिवासी और अन्य सभी समुदायों की रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक एवं धार्मिक प्रथाओं का कड़ाई से संधारण करेगी और उनके संरक्षण के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी. राज्य सरकार द्वारा गांव के अधिकारों और दायित्वों के संबंध में जो भी नियम जारी किए जाएंगे, वे आदिवासियों की प्रथा और उनके सामाजिक प्रबंधन के पूरी तरह अनुकूल होंगे.
प्रतिकूल प्रथाओं और नियमों को बदलने का भी मिला है कड़ा अधिकार
इस नियमावली में ग्राम सभा को एक और बेहद ताकतवर अधिकार दिया गया है. यदि ग्राम सभा को लगता है कि अनुसूचित क्षेत्र में लागू किया गया कोई भी सरकारी नियम उनकी पारंपरिक, सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं के बिल्कुल विपरीत (प्रतिकूल) है, तो वह बैठक कर इसके खिलाफ एक कड़क प्रस्ताव पारित कर सकती है. इस प्रस्ताव को उपायुक्त (DC) के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जाएगा. राज्य सरकार प्रस्ताव मिलने के 30 दिनों के भीतर एक विशेष जांच समिति का गठन करेगी, जो 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इसके बाद राज्य सरकार को हर हाल में छह महीने (160 दिनों) के भीतर लिए गए अंतिम निर्णय की जानकारी सीधे ग्राम सभा को लिखित रूप में देनी होगी.