Ranchi News : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस विषय पर आयोजित अल्पकालीन फेलोशिप कार्यक्रम का सफल समापन हो गया। यह कार्यक्रम रिम्स के रिसर्च सेल की ओर से आयोजित किया गया था, जिसे भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग का सहयोग प्राप्त था।करीब एक महीने तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को क्लीनिकल रिसर्च, शोध से जुड़े नैतिक पहलुओं और क्लीनिकल ट्रायल की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का पहला चरण 6 अप्रैल से 18 अप्रैल तक और दूसरा चरण 4 मई से 16 मई 2026 तक आयोजित किया गया।
डॉक्टरों, शोधार्थियों और प्रशिक्षुओं ने लिया हिस्सा
फेलोशिप कार्यक्रम में रिम्स के शिक्षक, रेजिडेंट डॉक्टर, स्नातकोत्तर छात्र, पीएचडी शोधार्थी और अन्य संस्थानों के प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। कोलकाता समेत कई संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण सत्र संचालित किए, जबकि रिम्स के विभिन्न विभागों के मेंटर्स ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
रिसर्च ग्रांट से शोध कार्यों को मिलेगा बढ़ावा
रिम्स प्रबंधन का कहना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संस्थान में शोध कार्यों को मजबूती मिलेगी और मरीजों के बेहतर इलाज के साथ नई चिकित्सा तकनीकों के विकास में भी मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने इस परियोजना के लिए अगले पांच वर्षों तक रिम्स को रिसर्च ग्रांट देने की मंजूरी दी है। इस परियोजना की प्रमुख अन्वेषक डॉ. अर्पिता रॉय और सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. एस. बी. सिंह हैं। कार्यक्रम का संचालन डीन रिसर्च, रिम्स रांची के मार्गदर्शन में किया गया।