Jharkhand News: रिम्स राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान की जमीन पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण के मामले में झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है. झारखंड हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद एसीबी ने सोमवार को रांची ब्रांच में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है.
जिन लोगों के अवैध मकान या निर्माण गिराए जा रहे हैं उन्हें मुआवजा दिया जाएगा: हाईकोर्ट
यह कार्रवाई झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ के निर्देश पर की गई है. अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान न सिर्फ अतिक्रमण हटाने के आदेश को बरकरार रखा बल्कि अवैध निर्माण में शामिल दोषी अधिकारियों की भूमिका की एसीबी जांच का भी निर्देश दिया था. हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के अवैध मकान या निर्माण गिराए जा रहे हैं उन्हें मुआवजा दिया जाएगा. हालांकि इस मुआवजे की पूरी राशि दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूली जाएगी. अदालत ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का गंभीर मामला माना है.
जांच के दायरे में वे अधिकारी आएंगे जिनकी मिलीभगत से सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ
अदालत के आदेश के अनुसार जांच के दायरे में वे अधिकारी आएंगे जिनकी मिलीभगत से सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ. इसमें राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर सरकारी भूमि पर नाम दर्ज कराने वाले अधिकारी शामिल हैं. इसके अलावा अवैध निर्माण के लिए किराया रसीदें या ऋण मुक्ति प्रमाणपत्र जारी करने वाले और भवन नक्शों को मंजूरी देने वाले अधिकारी भी जांच के घेरे में होंगे. पूरा मामला रिम्स की सात एकड़ से अधिक अधिग्रहित जमीन से जुड़ा है जो वर्ष 1964 और 1965 में अधिग्रहीत की गई थी. झालसा की रिपोर्ट में सामने आया था कि इस जमीन पर मंदिर दुकानें पार्क और मल्टी स्टोरी आवासीय इमारतें बना दी गईं. इन इमारतों में फ्लैट्स की बिक्री भी की गई.
रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने का सख्त निर्देश दिया था. इसके बाद से जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज कर दिया गया है.
सरकारी जमीन की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल
यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है बल्कि सरकारी जमीन की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. हाईकोर्ट की सख्ती और एसीबी की एंट्री से साफ है कि आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण में कई अहम खुलासे हो सकते हैं. जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही दोषी अधिकारियों और बिल्डरों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है.