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  • 2026-01-08

Ranchi News: झारखंड में टीबी जांच और इलाज को मिलेगी नई रफ्तार, जनभागीदारी पर जोर

Ranchi News: झारखंड में टीबी (क्षयरोग) उन्मूलन को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) की राज्य टीबी फोरम की अहम बैठक बुधवार को नेपाल हाउस, डोरंडा, रांची में आयोजित की गई.

बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग श्री अजय कुमार सिंह ने की.इस बैठक में एनएचएम के एमडी शशि प्रकाश झा, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

जांच कम होने वाले जिलों पर विशेष नजर
बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जिन जिलों में संभावित टीबी मरीजों की पहचान कम हो रही है, वहां इसके कारणों की जांच की जाए.साथ ही, जांच की संख्या बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया गया.
उन्होंने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया कि अपने-अपने विभाग से जुड़े संवेदनशील और जोखिम वाले समूहों की टीबी स्क्रीनिंग कराएं और उसका पूरा डेटा निक्षय पोर्टल पर दर्ज करें.

उद्योग विभाग और निक्षय मित्र पहल

उद्योग विभाग को निर्देश दिया गया कि वह निक्षय मित्र पहल के तहत टीबी मरीजों को गोद लेने और उन्हें सहयोग देने के लिए जरूरी पत्राचार करे, ताकि मरीजों को इलाज के साथ-साथ सामाजिक और पोषण सहयोग भी मिल सके.

मोबाइल जांच और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि जोखिम वाले इलाकों और समूहों में टीबी मरीजों की पहचान के लिए निक्षय वाहन, मोबाइल मेडिकल यूनिट और हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग तेजी से किया जा रहा है.

कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धियां


. धनबाद में कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (सीडीएसटी) लैब पूरी तरह से चालू हो गई है, जिससे रांची के इटकी स्थित आईआरएल लैब पर दबाव कम हुआ है.


. रिम्स, रांची में सीडीएसटी लैब को मजबूत किया गया है, जिसका उद्घाटन जल्द होगा.


. डाक विभाग के सहयोग से रांची में बलगम (खारिज) के नमूने के संग्रह और परिवहन की सुविधा शुरू की गई है, जिसे 15 जनवरी 2026 तक पूरे राज्य में लागू किया जाएगा.


. राज्य के 18 जिलों में पंचायत टीबी फोरम का गठन हो चुका है.


. रांची, चतरा, लातेहार, जमशेदपुर, बोकारो, कोडरमा और गिरिडीह में हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे गांव और समुदाय स्तर पर जांच आसान होगी.


आगे की कार्ययोजना

बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनभागीदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि 

. एनएएटी (न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट) जांच की संख्या बढ़ाई जाए.


. सभी पंचायतों में टीबी फोरम का गठन किया जाए.


. निक्षय मित्रों की संख्या बढ़ाई जाए.


. टीबी मरीजों को अतिरिक्त पोषण सहायता समय पर मिले, यह सुनिश्चित किया जाए.


इसके अलावा, राज्य में चरणबद्ध तरीके से 134 नई हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनें लगाने, 24 जिलों में ट्रूनेट मशीनें खरीदने, उपकरणों के लिए एएमसी (वार्षिक रखरखाव अनुबंध), नियमित जिला टीबी पदाधिकारियों की नियुक्ति और आगामी 100 दिवसीय टीबी अभियान की तैयारी पर भी चर्चा हुई.

कई विभागों की भागीदारी

इस बैठक में डाक विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग, श्रम विभाग, ग्रामीण विकास, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग, पंचायती राज विभाग और झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित कई विभागों के राज्य स्तरीय अधिकारी शामिल हुए.
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विभागों और समाज के सहयोग से झारखंड में टीबी उन्मूलन अभियान को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा.
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