Ranchi News: मनरेगा बचाओ अभियान के तहत पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज झारखंड के सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस पार्टी की ओर से एक दिवसीय उपवास का आयोजन किया गया. इसी क्रम में राजधानी रांची में महात्मा गांधी की प्रतिमा, बापू वाटिका के समक्ष कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उपवास रखकर केंद्र सरकार के नए कानून का विरोध किया.
महात्मा गांधी का नाम हटाना गरीब विरोधी कदम
उपवास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना और रोजगार की गारंटी को कमजोर करना गरीब विरोधी कदम है. उन्होंने कहा कि नया कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर करेगा और इससे सबसे ज्यादा नुकसान दलितों, आदिवासियों और गरीब महिलाओं को होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के लागू होने से रोजगार अब अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर हो जाएगा.
मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए सुरक्षा
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अब तक मनरेगा संकट के समय हर साल करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए सुरक्षा कवच साबित हुआ है, लेकिन नए प्रावधानों से सारी शक्तियां केंद्र के हाथों में सिमट जाएंगी. पंचायतों की भूमिका सीमित हो जाएगी और कई पंचायतों को फंड नहीं मिलने से स्थानीय विकास कार्य बाधित होंगे. उन्होंने इसे संविधान के 73वें संशोधन की भावना के खिलाफ बताया.
केशव महतो कमलेश ने आगे कहा कि नए कानून में बजट और कार्य आवंटन की सीमा पहले से तय कर दी जाएगी, जिससे फंड खत्म होते ही काम बंद हो जाएगा. इसके साथ ही मजदूरी को महंगाई से जोड़ने की व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है. उन्होंने कहा कि कृषि के पीक सीजन में 60 दिनों का काम भी अब सुनिश्चित नहीं रहेगा, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ेगी.
उन्होंने कहा कि कागजों से गांधी का नाम हटाया जा सकता है, लेकिन देश की जनता के दिलों से महात्मा गांधी को हटाना संभव नहीं है. कांग्रेस पार्टी पहले भी मजदूरों और गरीबों के अधिकारों के लिए लड़ती रही है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा.
विचारों की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई
इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि कांग्रेस मनरेगा और गांधी के विचारों की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है. उन्होंने कहा कि गांधी के सपनों को गांधी के ही देश में कुचलने नहीं दिया जाएगा.
उपवास कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर सहित कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे. सभी ने एक स्वर में मनरेगा को कमजोर करने वाले कानून के खिलाफ संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया.