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  • 2026-01-12

Jharkhand News: हर दिन 350 बच्चे लापता, 47 हजार से अधिक अब भी गुम, NCRB के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

Jharkhand News: देश में बच्चों के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और यह एक गंभीर सामाजिक समस्या का रूप ले चुकी है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के कुल 1 लाख 27 हजार 874 बच्चे लापता हुए. इसका मतलब है कि देश में औसतन हर दिन करीब 350 बच्चे गुम हो रहे हैं.


हालांकि राहत की बात यह है कि इस दौरान 80 हजार 561 बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया, लेकिन अब भी 47 हजार 313 बच्चे लापता हैं. इन आंकड़ों ने लाखों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है.


लापता बच्चों के मामलों में झारखंड 20वें स्थान पर
झारखंड, जो मानव तस्करी के मामलों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है, लापता बच्चों की संख्या के मामले में देश में 20वें स्थान पर है. राज्य से कुल 748 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 335 बच्चों को खोज लिया गया, जबकि बाकी अब भी लापता हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की लड़कियां अक्सर मानव तस्करी, घरेलू काम या झूठे रोजगार के लालच में फंस जाती हैं. इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार और पुलिस ऑपरेशन मुस्कान जैसे अभियान चला रही है.

सबसे ज्यादा लापता बच्चों वाले राज्य
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, कुछ राज्यों में यह समस्या बेहद गंभीर है.

• पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 19,540 बच्चे लापता हुए.
• मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां 15,087 बच्चे गुम हुए.
• बिहार तीसरे स्थान पर है, यहां 12,600 बच्चे लापता हुए.

इसके अलावा दिल्ली, तमिलनाडु, ओडिशा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ भी शीर्ष दस राज्यों में शामिल हैं.

80 हजार से अधिक बच्चे मिले, फिर भी चिंता बरकरार
देशभर में जहां 80,561 बच्चों की सकुशल वापसी हो चुकी है, वहीं 47,313 बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. यह स्थिति न केवल प्रशासन के लिए बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चेतावनी है.

संक्षेप में आंकड़े
• कुल लापता बच्चे: 1,27,874
• कुल बरामद बच्चे: 80,561
• अब भी लापता: 47,313

लड़कियां ज्यादा होती हैं शिकार
आंकड़ों से साफ है कि लापता होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक है. कई मामलों में उन्हें मानव तस्करी, यौन शोषण, बाल विवाह और अवैध गतिविधियों में धकेल दिया जाता है. अपराधी बच्चों को बहला-फुसलाकर या जबरन अपहरण कर इन अपराधों को अंजाम देते हैं.

राज्यवार लापता बच्चों के प्रमुख आंकड़े
• पश्चिम बंगाल: 19,540
• मध्यप्रदेश: 15,087
• बिहार: 12,600
• दिल्ली: 11,880
• तमिलनाडु: 8,876
• ओडिशा: 7,565
• राजस्थान: 7,412
• उत्तरप्रदेश: 5,924
• महाराष्ट्र: 5,393
• छत्तीसगढ़: 5,210
• झारखंड: 748
• बरामद किए गए बच्चों के आंकड़े
• पश्चिम बंगाल: 12,546
• मध्यप्रदेश: 11,161
• तमिलनाडु: 6,444
• राजस्थान: 6,232
• दिल्ली: 5,840
• बिहार: 5,819
• झारखंड: 335

समाज और सरकार की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के लापता होने की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता, त्वरित पुलिस कार्रवाई, सामाजिक जागरूकता और सख्त कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है. जब तक समाज और प्रशासन मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक यह समस्या खत्म होना मुश्किल है.

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