Jharkhand News: धनबाद के वासेपुर का कुख्यात अपराधी प्रिंस खान बीते सात महीने से यूएई के दुबई में बिना वैध वीजा के रह रहा है. जून 2025 में उसका वीजा खत्म हो चुका है जबकि इससे पहले ही उसका पासपोर्ट रद्द किया जा चुका था. इसके बावजूद प्रिंस खान विदेश में पनाह लेकर अपने नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है. उसके साथ उसका बड़ा भाई गोपी खान और करीबी सैफ अब्बास नकवी उर्फ सैफी भी दुबई में छिपा हुआ है.
वासेपुर में सक्रिय हैं गैंग के गुर्गे
विदेश में बैठकर प्रिंस खान वासेपुर समेत धनबाद और झारखंड के अन्य इलाकों में अपने गुर्गों के जरिए गैंग्स ऑफ वासेपुर चला रहा है. सोमवार को पुलिस ने उसके नेटवर्क पर दबाव बढ़ाते हुए 12 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं. पुलिस पांच लोगों समेत करीब सात अन्य संदिग्धों की आय के स्रोत की जांच में जुटी है.
रंगदारी और अंतरराष्ट्रीय दबाव
जांच में सामने आया है कि प्रिंस खान लगातार कारोबारियों को रंगदारी के लिए फोन कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस पर कई एजेंसियों की नजर है और उसके प्रत्यर्पण की कोशिशें चल रही हैं. दूसरी ओर पुलिस भी उसके करीबियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है ताकि नेटवर्क की कमर तोड़ी जा सके.
छापेमारी में जमीन के दस्तावेज बरामद
वासेपुर में हुई छापेमारी के दौरान पुलिस को जमीन के 40 डीड भी हाथ लगे हैं. प्रिंस खान और उसके भाई की पत्नी और बच्चे भी दुबई शिफ्ट हो चुके हैं. कुर्की की कार्रवाई के बाद उसके माता पिता और अन्य रिश्तेदार वासेपुर छोड़ चुके हैं. पुलिस अब रिश्तेदारों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.
महिलाओं के जरिए भी चल रहा धंधा
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गैंग के संचालन में कुछ महिलाओं की भूमिका है. शगुफ्ता नाम की महिला दुबई से बैठकर रंगदारी के धंधे को संभाल रही है. रांची जेल जा चुकी शगुफ्ता की मौसी रोजी परवीन पहले ही इस नेटवर्क से जुड़े कई राज खोल चुकी है. प्रिंस खान ने अपने धंधे को धार देने के लिए परिवार की महिलाओं और रिश्तेदारों को भी आगे कर दिया था.
112 केस और सवा सौ से ज्यादा गिरफ्तारियां
प्रिंस खान 24 नवंबर 2021 को अपने मामा फहीम खान के करीबी नन्हे की हत्या के दिन से फरार है. झारखंड और बिहार में उसके खिलाफ 112 से अधिक मामले दर्ज हैं. बीते चार वर्षों में उससे जुड़े सवा सौ से ज्यादा लोग जेल भेजे जा चुके हैं. पुलिस और एटीएस उसके घर पर दो बार कुर्की की कार्रवाई कर चुकी है. जुलाई 2023 में उसके खिलाफ रेड और ब्लू कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था.
संगठित अपराध अब सीमाओं से बाहर
प्रिंस खान का मामला यह दिखाता है कि संगठित अपराध अब सीमाओं से बाहर बैठकर भी स्थानीय नेटवर्क चला रहा है. पुलिस की लगातार कार्रवाई से दबाव जरूर बढ़ा है लेकिन विदेश में बैठे सरगना तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. आने वाले दिनों में प्रत्यर्पण और मनी ट्रेल की जांच इस केस की दिशा तय करेगी.