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  • 2026-01-14

Municipal Elections: झारखंड नगर निकाय का चुनावी शंखनाद, मानगो, जुगसलाई, आदित्यपुर में सियासी पारा गरम, फरवरी में जनता तय करेगी फैसला, देखें वीडियो

Municipal Elections (Rishabh Rahul): झारखंड की सियासत में लंबे इंतजार के बाद अब बड़ा चुनावी धमाका तय है. फरवरी में नगर निकाय चुनाव के साथ ही उन शहरों में लोकतंत्र लौटेगा, जहां सालों से अफसरशाही हावी रही, 48 नगर निकायों में एक ही दिन मतदान होगा और होली से पहले पूरा चुनावी खेल खत्म कर दिया जाएगा. जमशेदपुर शहरी क्षेत्र में चुनाव इसलिए खास है क्योंकि मानगो नगर निगम और जुगसलाई नगर परिषद जहां पूर्वी सिंहभूम जिले में आते हैं, वहीं शहर से ठीक सटा आदित्यपुर नगर निगम प्रशासनिक रूप से सरायकेला-खरसावां जिले का हिस्सा है. शहर एक, सिस्टम अलग और सियासत पूरी तरह गरम.

राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब तस्वीर पूरी तरह साफ
राज्य चुनाव आयोग के प्रस्ताव पर राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब तस्वीर पूरी तरह साफ है. 24 से 27 फरवरी के बीच किसी एक दिन वोटिंग होगी और 28 फरवरी या 1 मार्च को नतीजे आ सकते हैं. हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के कारण आयोग और सरकार दोनों फुल एक्शन मोड में हैं. 20 जनवरी के बाद कभी भी चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है. नामांकन से लेकर मतगणना तक पूरा शेड्यूल टाइट रखा गया है, ताकि 31 मार्च से पहले कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी जा सके.



निकाय चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक
इस बार का निकाय चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है. ट्रिपल टेस्ट पूरा होने के बाद पहली बार नगर निकायों में वोटिंग हो रही है. 2020 में कोरोना के नाम पर चुनाव टल गए थे, फिर भाजपा सरकार के दौर में ओबीसी आरक्षण और कानूनी पेंच में मामला उलझता चला गया. नतीजा यह हुआ कि शहरी जनता सालों तक बिना चुने हुए प्रतिनिधियों के रही. अब हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में, कोर्ट के दबाव के बाद, चुनाव की गाड़ी पटरी पर आई है.

मानगो में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित
जमशेदपुर जिले की बात करें तो यहां मानगो नगर निगम में 36 वार्ड हैं और मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित किया गया है. जुगसलाई नगर परिषद में 22 वार्ड हैं और अध्यक्ष की कुर्सी भी महिला के लिए आरक्षित है. वहीं जमशेदपुर से सटे औद्योगिक शहर आदित्यपुर नगर निगम, जो सरायकेला-खरसावां जिला में आता है, वहां 35 वार्ड हैं और मेयर का पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित किया गया है. यही प्रशासनिक और आरक्षण का फर्क तीनों जगह अलग-अलग सियासी समीकरण बना रहा है.

बन्ना गुप्ता का राजनीतिक वर्चस्व दांव पर
मानगो नगर निगम में मुकाबला सबसे ज्यादा हाई-प्रोफाइल दिख रहा है. यहां पूरी लड़ाई “विरासत बनाम बदलाव” की है. कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता सत्ता और संगठन के दम पर मजबूत दावेदार हैं. बन्ना गुप्ता का राजनीतिक वर्चस्व दांव पर है. दूसरी तरफ नीरज सिंह और अविनाश सिंह राजा जैसे युवा चेहरे बदलाव का नारा लेकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. महिला आरक्षण के कारण ये नेता अपने परिवार की महिलाओं को उम्मीदवार बना सकते हैं. यहां चुनौती यह है कि एंटी-इंकम्बेंसी बनाम युवा जोश में जनता किस तरफ झुकती है.

जुगसलाई नगर परिषद में मुकाबला अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल लेकिन अंदरखाने काफी तेज है. यह इलाका व्यापार और बाजार की राजनीति के लिए जाना जाता है. झामुमो-कांग्रेस गठबंधन यहां अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहता है, जबकि भाजपा संगठन और व्यापारिक समर्थन के भरोसे मुकाबले में उतरने की तैयारी कर रही है.

विनोद श्रीवास्तव और अमित सिंह नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
अब बात आदित्यपुर की, जो भले ही जमशेदपुर से सटा है, लेकिन प्रशासनिक रूप से सरायकेला-खरसावां जिला में आता है. यहां एसटी आरक्षण ने पूरा खेल पलट दिया है. पूर्व मेयर विनोद श्रीवास्तव और पूर्व डिप्टी मेयर अमित सिंह अब खुद चुनाव नहीं लड़ सकते, लेकिन वे पूरी तरह आउट भी नहीं हुए हैं. दोनों नेता अब किंगमेकर की भूमिका में हैं और अपने समर्थित आदिवासी उम्मीदवारों के जरिए सत्ता पर असर बनाए रखना चाहते हैं. झामुमो का पारंपरिक आदिवासी वोट बैंक यहां उसकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है.

तीनों निकायों में जनता का गुस्सा
जन मुद्दों की बात करें तो तीनों निकायों में जनता का गुस्सा लगभग एक जैसा है. मानगो में पानी की भारी किल्लत और ट्रैफिक जाम, जुगसलाई में अतिक्रमण और पार्किंग की समस्या, और आदित्यपुर में अधूरी सीवरेज योजना व खुदी सड़कों से लोग परेशान हैं. होल्डिंग टैक्स को लेकर शहरी मध्यम वर्ग खुलकर नाराजगी जता रहा है. इस बार माहौल साफ है, लोग चेहरा नहीं, काम देखना चाहते हैं.

शहर अफसरशाही के भरोसे चलते रहे
चुनाव में देरी का खामियाजा सीधे जनता ने भुगता. बिना चुने हुए प्रतिनिधियों के न तो जवाबदेही रही, न ही विकास योजनाओं की रफ्तार. फंडिंग अटकी रही और शहर अफसरशाही के भरोसे चलते रहे. फरवरी-मार्च के ये नगर निकाय चुनाव सिर्फ शहरी सरकार चुनने का मौका नहीं हैं, बल्कि यह तय करेंगे कि जमशेदपुर शहरी क्षेत्र और उससे सटे आदित्यपुर की राजनीति किस दिशा में जाएगी. मानगो में हाई-प्रोफाइल टक्कर, जुगसलाई में स्थानीय समीकरण और आदित्यपुर में आदिवासी नेतृत्व की जंग, तीनों मिलकर इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और सियासी तौर पर अहम बना रहे हैं.
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