Jharkhand Politics: रांची में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चयन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली भाजपा अपने प्रदेश अध्यक्ष के लिए पांच नाम तक सामने नहीं ला सकी. उनके अनुसार अध्यक्ष का चयन किसी खुली और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि केवल नामांकन के जरिये किया गया, जो पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र के कमजोर पड़ने का संकेत है.
वरिष्ठ नेताओं का नाम न होना बना मुद्दा
राकेश सिन्हा ने कहा कि रघुवर दास, चंपाई सोरेन और अर्जुन मुंडा जैसे वरिष्ठ नेताओं का नामांकन में शामिल न होना यह बताता है कि भाजपा में फैसले अब सीमित दायरे में लिए जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर व्यापक चर्चा और सहमति की परंपरा समाप्त होती जा रही है और निर्णय कुछ ही लोगों के हाथों में सिमट गए हैं.
पार्टी पर केंद्रीय नेतृत्व का नियंत्रण
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा अब स्वतंत्र राजनीतिक दल के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नियंत्रण में काम कर रही संस्था बन गई है. उन्होंने कहा कि संगठनात्मक निर्णयों में राज्य स्तर के नेताओं की भूमिका लगातार कम होती जा रही है, जिससे पार्टी की जमीनी ताकत प्रभावित हो रही है.
पेसा कानून पर बयान देने का अधिकार नहीं
राकेश सिन्हा ने नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष के बयानों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं को पेसा कानून पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि अपने शासनकाल में पार्टी ने इसे लागू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की. कांग्रेस नेता ने सलाह दी कि पेसा पर टिप्पणी करने के बजाय भाजपा को अपने कमजोर और बिखरे संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चयन को लेकर कांग्रेस के तीखे हमले से राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है. आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पर उठे सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और धार दे सकते हैं.