आपको बताते हैं कैसे हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, प्लांट में चिमनी के भीतर सेरेमिक ब्रिक लाइनिंग का काम चल रहा था। सादिक, इस्तकार और एक अन्य मजदूर ईंटें लेकर लिफ्ट के जरिए ऊपर जा रहे थे। इसी दौरान लिफ्ट में अचानक तकनीकी खराबी आई और वह असंतुलित होकर पलट गई।
हादसे के वक्त एक मजदूर ने सूझबूझ दिखाते हुए लिफ्ट के तार को पकड़ लिया और हवा में लटक गया, जिससे उसकी जान बच गई। वहीं, सादिक 22 वर्ष और इस्तकार 25 वर्ष संभल नहीं पाए और सीधे नीचे कंक्रीट पर जा गिरे।
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
हादसे के बाद सहकर्मियों ने तुरंत दोनों को लहूलुहान हालत में जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, चोटें इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के शारदा हेडी गांव के रहने वाले थे।
प्रशासनिक जांच और सुरक्षा पर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। लोगों का आरोप है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा था।
चिमनी जैसे ऊंचे निर्माण कार्यों में सुरक्षा नेट और हार्नेस बेल्ट का होना अनिवार्य है। लिफ्ट की तकनीकी जांच नियमित रूप से होनी चाहिए थी। स्थानीय ग्रामीण फिलहाल पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। इस हादसे के बाद पावर प्लांट परिसर में मातम और आक्रोश का माहौल है।