धालभूमगढ़ हादसा: सुरक्षा चूक बनी जानलेवा
धालभूमगढ़ प्रखंड स्थित गजानन फिरो कंपनी के निर्माणाधीन पावर प्लांट में चिमनी निर्माण के दौरान लिफ्ट खराब होने से लगभग 40 फीट की ऊंचाई से गिरकर दो मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के शारदा हेडी गांव निवासी लगभग 22 वर्षीय सादिक और 25 वर्षीय इस्तकार की जान चली गई। दोनों को गंभीर हालत में एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी।
मानगो फ्लाईओवर पर भी वही हालात
धालभूमगढ़ की घटना के बावजूद मानगो फ्लाईओवर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है। मजदूर बिना सेफ्टी बेल्ट और बिना लाइफलाइन के ऊंचाई पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यहां भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
सवालों के घेरे में प्रशासन और ठेकेदार
लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी न तो ठेकेदारों पर सख्ती दिख रही है और न ही इस ओर प्रशासन की नजर पद रही है। नियमों के अनुसार ऊंचाई पर कार्य के दौरान सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट, सेफ्टी नेट और प्रशिक्षित सुपरविजन अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।
चेतावनी है धालभूमगढ़ की घटना
धालभूमगढ़ पावर प्लांट हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यदि मानगो फ्लाईओवर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो मजदूरों की जान यूं ही खतरे में पड़ती रहेगी।