Jharkhand News: झारखंड में सरकारी बकाया वसूली से जुड़े सर्टिफिकेट केस का जिलावार प्रदर्शन सामने आया है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य के कुछ जिलों ने मामलों के निपटारे में बेहतर प्रदर्शन किया है जबकि कई जिले अब भी लंबित मामलों के बोझ से जूझ रहे हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्यभर में कुल 22,664 सर्टिफिकेट केस दर्ज हुए थे जिनमें से 14,262 मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इस तरह राज्य का औसत निपटारा 62.93 प्रतिशत रहा जबकि 37.07 प्रतिशत मामले अब भी लंबित हैं.
इन जिलों ने निपटारे में दिखाई तेजी
आंकड़ों के मुताबिक कोडरमा, लातेहार और सिमडेगा ऐसे जिले रहे जहां सर्टिफिकेट केस का शत प्रतिशत निपटारा किया जा चुका है. गोड्डा में 99.8 प्रतिशत, पाकुड़ में 99.66 प्रतिशत, लोहरदगा में 99.29 प्रतिशत, पश्चिमी सिंहभूम में 98.11 प्रतिशत और हजारीबाग में 90.77 प्रतिशत मामलों का निपटारा हुआ है. गढ़वा जिले में सबसे अधिक 2,634 सर्टिफिकेट केस दर्ज किए गए थे जिनमें से 92.41 प्रतिशत मामलों को निपटाया जा चुका है.
कई जिलों में अब भी चिंता बढ़ा रही स्थिति
दूसरी ओर कुछ जिलों में सर्टिफिकेट केस की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है. खूंटी जिले में हालात सबसे गंभीर माने जा रहे हैं जहां कुल 2,579 मामलों में से केवल 26.33 प्रतिशत का ही निपटारा हो सका है जबकि 73.67 प्रतिशत मामले अब भी लंबित हैं. जामताड़ा में 58.44 प्रतिशत देवघर में 58.82 प्रतिशत दुमका में 47.14 प्रतिशत और रामगढ़ में 45.11 प्रतिशत मामलों का ही निपटारा हुआ है.
राजधानी रांची की स्थिति
राजधानी रांची में कुल 117 सर्टिफिकेट केस दर्ज किए गए थे. इनमें से 104 मामलों का निपटारा कर लिया गया है जबकि 13 मामले अब भी लंबित हैं. प्रतिशत के लिहाज से रांची की स्थिति संतोषजनक मानी जा रही है लेकिन शून्य लंबित का लक्ष्य अभी दूर है.
सर्टिफिकेट केस क्या होता है
सर्टिफिकेट केस वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके जरिए सरकार या सरकारी संस्थाएं किसी व्यक्ति संस्था या कंपनी से बकाया राशि की वसूली करती हैं. यह प्रक्रिया बिहार और ओडिशा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट 1914 के तहत संचालित होती है जो झारखंड में भी लागू है.
किन मामलों में दर्ज होते हैं सर्टिफिकेट केस
सरकारी ऋण या अनुदान की बकाया राशि भूमि राजस्व लगान या अन्य कर बकाया बिजली बिल खनन रॉयल्टी जुर्माना और बैंक या सहकारी ऋण से जुड़ी सरकारी वसूली के मामलों में सर्टिफिकेट केस दर्ज किया जाता है. तय समय पर भुगतान नहीं होने पर संबंधित विभाग प्रमाण पत्र पदाधिकारी के समक्ष मामला दर्ज करता है जिसके बाद नोटिस जारी कर वसूली की प्रक्रिया शुरू होती है.