नए कानून के तहत झारखंड में 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग संस्थानों को अपने कोर्स की फीस, शुल्क संग्रह की प्रक्रिया, लेखांकन और ऑडिट से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी। संस्थानों को किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित पिछले तीन वित्तीय वर्षों के खातों का विवरण भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी
विधेयक में कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण को पांच वर्षों के लिए वैध किया गया है। पंजीकरण के लिए प्रत्येक सेंटर को पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा करनी होगी। यदि कोई संस्थान अलग सेंटर खोलता है तो उसके लिए अलग से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।
कानून के अनुसार, कोचिंग सेंटर को अपनी फीस संरचना, कोर्स, ट्यूटर और आधारभूत संरचना की जानकारी रेगुलेटरी कमेटी को देनी होगी। साथ ही सभी संस्थानों को एक वेब पोर्टल पर नियमित रूप से जानकारी अपडेट करनी होगी।
अभिभावकों की अनुमति
बुनियादी ढांचे को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। प्रत्येक छात्र के लिए न्यूनतम एक वर्ग मीटर स्थान, आवश्यक सुविधाएं और अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य होगा। इसके अलावा 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को पढ़ाने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी होगी।
शिकायत पेटी और समाधान तंत्र
मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, 1000 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग सेंटर में मनोचिकित्सक की नियुक्ति अनिवार्य की गई है। छात्रों की शिकायतों के लिए प्रत्येक सेंटर में शिकायत पेटी और समाधान तंत्र भी बनाना होगा।
30 दिनों के भीतर अपील
नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। पहली बार नियम तोड़ने पर पांच लाख रुपये और दूसरी बार 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में सेंटर का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकेगा। जुर्माने से असंतुष्ट संस्थान 30 दिनों के भीतर अपील कर सकते हैं।
गुणवत्तापूर्ण कोचिंग व्यवस्था उपलब्ध
कोचिंग संस्थानों की निगरानी के लिए जिला और राज्य स्तर पर रेगुलेटरी कमेटी का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर कमेटी के अध्यक्ष उपायुक्त (डीसी) होंगे। इस कानून के माध्यम से राज्य सरकार का उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण कोचिंग व्यवस्था उपलब्ध कराना है।