Jharkhand News: झारखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान छात्रों की संदिग्ध मौत और हत्या के कई मामले सामने आए हैं. इन घटनाओं ने न सिर्फ पीड़ित परिवारों को झकझोर दिया, बल्कि पूरे राज्य में आक्रोश भी पैदा किया. मामलों की गंभीरता को देखते हुए कुछ प्रकरणों में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, जबकि कुछ मामलों में हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई. इन जांचों में कहीं सीबीआई को बड़ी सफलता मिली, तो कहीं कई साल बीत जाने के बाद भी सच्चाई सामने नहीं आ सकी है.
फरवरी 2016: सफायर स्कूल छात्र विनय महतो हत्याकांड
रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल में सातवीं कक्षा के छात्र विनय महतो (13 वर्ष) का शव स्कूल परिसर में मिला था. शुरुआती जांच में पुलिस ने स्कूल की एक शिक्षिका नाजिया हुसैन और उनके परिजनों को आरोपी बताया था.
पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर विनय के पिता मनबहाल महतो ने वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. इसके बाद 7 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी.
सीबीआई की रांची शाखा ने 20 जुलाई 2022 को प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन घटना के करीब आठ साल बाद भी यह मामला पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है.
25 जुलाई 2016: डीपीएस छात्र अंतरिक्ष शनिग्रही की मौत
डीपीएस रांची के छात्र अंतरिक्ष शनिग्रही 25 जुलाई 2016 की रात अरगोड़ा–बिरसा चौक मार्ग पर गंभीर अवस्था में मिले थे. दो दिन बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
अंतरिक्ष की मां रूपाली महंती ने पिता और अन्य रिश्तेदारों पर हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. पहले रांची पुलिस और फिर सीआईडी ने जांच की, लेकिन दोनों एजेंसियों को हत्या के ठोस सबूत नहीं मिले.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जनवरी 2021 से सीबीआई इस केस की जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि यह सड़क हादसा था या फिर साजिश के तहत की गई हत्या.
15 दिसंबर 2016: बीटेक छात्रा हत्याकांड में सीबीआई की बड़ी सफलता
रांची के बूटी बस्ती में एक बीटेक छात्रा के साथ दुष्कर्म और उसकी बेरहमी से हत्या के मामले में सीबीआई को बड़ी कामयाबी मिली. दिसंबर 2017 तक राज्य पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका था, जिसके बाद केस सीबीआई दिल्ली को सौंपा गया.
सीबीआई ने जांच को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश के लखनऊ तक कड़ियां जोड़ीं, जहां आरोपी राहुल राज द्वारा इसी तरह की एक और घटना को अंजाम देने का खुलासा हुआ.
जून 2019 में सीबीआई ने राहुल राज को गिरफ्तार किया. वैज्ञानिक सबूतों और मजबूत जांच के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई.
इन मामलों ने यह साफ कर दिया कि झारखंड में छात्रों से जुड़ी घटनाएं बेहद संवेदनशील हैं. कुछ मामलों में सीबीआई जांच से न्याय मिला, लेकिन कई केस आज भी सवालों के घेरे में हैं, जिनका जवाब पीड़ित परिवार अब भी तलाश रहे हैं.