Jamshedpur: सिदगोड़ा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर परिसर एक बार फिर भव्य धार्मिक आयोजनों का साक्षी बनने जा रहा है। बुधवार को मंदिर समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मंदिर स्थापना की छठवीं वर्षगांठ को इस बार अभूतपूर्व तरीके से मनाया जाएगा। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में विशाल गरुड़ स्तंभ की स्थापना और शिवलिंग की पुनर्स्थापना का भी भव्य आयोजन होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की गरिमामयी उपस्थिति
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने की, जिसमें मुख्य संरक्षक और ओडिशा के राज्यपाल व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक में संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह सहित समिति के पदाधिकारियों ने कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की।
पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का पूरा शेड्यूल
अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह महोत्सव कई चरणों में संपन्न होगा, 25, 26 एवं 27 फरवरी तीन दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे, जिसके अंतर्गत गरुड़ स्तंभ की स्थापना और शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।
27 फरवरी शाम 5 बजे पूरे मंदिर परिसर को दीपों से जगमग किया जाएगा दीपोत्सव। 28 फरवरी सुबह सुंदरकांड का पाठ होगा और शाम 7 बजे से विशाल महाभंडारा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों भक्तों के शामिल होने की उम्मीद है।
व्यवस्थाओं के लिए उप-समितियों का गठन
आयोजन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिम्मेदारियां बांटी गई हैं। शोभा यात्रा की कमान दिनेश कुमार और खेमलाल चौधरी को दी गई है, जबकि महाप्रसाद की जिम्मेदारी पवन अग्रवाल और उनकी टीम संभालेगी। यातायात से लेकर साउंड, लाइट और मीडिया प्रबंधन के लिए भी अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति की गई है।
जन-जन तक पहुँचेगा निमंत्रण
समिति ने निर्णय लिया है कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामुदायिक उत्सव होगा। समिति के सदस्य घर-घर जाकर शहर के धर्मप्रेमियों से मुलाकात करेंगे और उन्हें सपरिवार इस महोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेंगे। बैठक में मुख्य रूप से: महासचिव अखिलेश चौधरी, दिनेश कुमार, गुंजन यादव, मिथिलेश सिंह यादव, और अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।
विशेष अपील
जमशेदपुर की पहचान केवल उद्योगों से ही नहीं, बल्कि यहाँ की अटूट धार्मिक आस्था से भी है। सूर्य मंदिर समिति द्वारा आयोजित यह भव्य उत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का एक प्रयास है। लोगों से अपील है कि शहर के सभी नागरिक इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बनें और सादगी व श्रद्धा के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। आइए, भक्ति के इस संगम में शामिल होकर अपने शहर की सुख-शांति की कामना करें।