Jamshedpur : जमशेदपुर के बोड़ाम थाना क्षेत्र अंतर्गत गेरुआ गांव स्थित लेक व्यू होटल एवं रिसॉर्ट में 18 जनवरी की रात एक सनसनीखेज आपराधिक घटना सामने आई है। रिसॉर्ट के प्रबंधक संतोष गिरी के साथ कथित रूप से न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उनका अपहरण कर जंगल ले जाकर 70 लाख रुपये की फिरौती भी मांगी गई। पीड़ित का आरोप है कि यह घटना अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक और संपत्ति विवाद का नतीजा है।
पीड़ित संतोष गिरी के अनुसार 18 जनवरी की रात करीब 2:18 बजे दो कारों से 4-5 लोग उनके रिसॉर्ट पहुंचे। इनमें से एक कार का नंबर JH05 DV 5115 (टाटा पंच) बताया गया है, जबकि दूसरी कार का नंबर फिलहाल अज्ञात है। आरोप है कि हमलावरों ने पहले रिसॉर्ट का गेट फांदकर अंदर प्रवेश किया और फिर जबरन गेट खुलवाकर दोनों गाड़ियों को भीतर लाया। आधी रात में पास स्थित पतंजलि वेलनेस सेंटर का गेट खुद को मरीज बताकर खुलवाने की कोशिश भी की गई, इस दौरान 9931837874 से कॉल किया गया जो एक अपराधी स्वराज गगराई का बताया जा रहा है, लेकिन असफल रहने पर आरोपियों ने जबरन रिसॉर्ट परिसर में प्रवेश किया।
पीड़ित के अनुसार, इसके बाद आरोपी उनके कमरे में घुस आए और उन्हें घसीटते हुए बेरहमी से पीटा। इसके बाद जबरन कार में बैठाकर उन्हें रिसॉर्ट से बाहर जंगल की ओर ले जाया गया, जहां जान से मारने की धमकी देते हुए 70 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। संतोष गिरी का कहना है कि इस दौरान उनके कमरे से लगभग एक लाख रुपये नकद भी लूट लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों के पास कट्टा और रिवॉल्वर जैसे हथियार थे और वे पूरी तरह से जान से मारने की नीयत से आए थे।
चचेरे भाइयों पर गंभीर आरोप
संतोष गिरी ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि इस पूरे घटनाक्रम में उनके चचेरे भाई संजीत गिरी, आशुतोष गिरी, स्वराज गगराई और दो अन्य अज्ञात लोग शामिल थे। पीड़ित के अनुसार, आरोपी पिछले कई महीनों से उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को लगातार धमकियां दे रहे थे और संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर दबाव बना रहे थे। उन्होंने कहा है कि आरोपी उनकी पारिवारिक संपत्तियों को अपने नाम कराने की मांग कर रहे थे और इनकार करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही थी।
कोलकाता की संपत्ति विवाद से भी जुड़ा मामला
पीड़ित ने यह भी बताया है कि उनका कारोबार कोलकाता में है, जहां न्यू टाउन इलाके में उनका एक रिसॉर्ट प्रोजेक्ट रहा है। संतोष गिरी का आरोप है कि कोलकाता स्थित उनकी इस संपत्ति को लेकर भी पहले विवाद हुआ था और उसी दौरान भी आरोपियों ने वहां हंगामा, मारपीट और धमकी की घटनाओं को अंजाम दिया था। उनके अनुसार, कोलकाता में हुए विवाद के चलते उनकी संपत्ति एक लीगल मामले में फंस गई और कारोबार बंद हो गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पीड़ित का कहना है कि जमशेदपुर में लेक व्यू रिसॉर्ट को विकसित करने के पीछे भी उनका उद्देश्य अपने बंद पड़े कारोबार के बाद दोबारा जीवन को पटरी पर लाना था, लेकिन यहां भी उन्हें इसी तरह के आपराधिक दबाव और हिंसा का सामना करना पड़ा।
सीसीटीवी में कैद पूरी वारदात
पीड़ित के मुताबिक, पूरी घटना रिसॉर्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि 4-5 युवक उन्हें घसीटते हुए ले जा रहे हैं और बाद में काले रंग की टाटा पंच कार में जबरन बैठा रहे हैं। संतोष गिरी ने बताया है कि इन सभी वीडियो क्लिप्स, फोटो और वाहनों से जुड़े विवरण उन्होंने पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंप दिए हैं।
पीड़ित ने बताया कि पुलिस गश्ती दल की सक्रियता के चलते सुबह करीब 5:30 बजे संतोष गिरी को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया गया। इस दौरान दो आरोपियों को पकड़कर थाना लाया गया और बाद में जेल भेज दिया गया, जबकि तीन आरोपी मौके से फरार हो गए।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब मामला अपहरण, फिरौती, लूट और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा है और सीसीटीवी जैसे ठोस साक्ष्य भी मौजूद हैं, तब भी अब तक सभी आरोपियों पर सख्त धाराओं में कार्रवाई नहीं की गई। फरार आरोपियों और घटना में प्रयुक्त वाहनों के मालिकों के खिलाफ भी ठोस कदम न उठाए जाने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कैरव गांधी मामले से तुलना
गौरतलब है कि हाल ही में जमशेदपुर के बिष्टुपुर क्षेत्र से जुड़े उद्योग समूह के युवक कैरव गांधी के लापता होने का मामला भी लगातार सुर्खियों में रहा है। उस मामले में भी पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और जांच को लेकर कई सवाल उठे थे। ऐसे में संतोष गिरी का सुरक्षित बरामद होना भले ही राहत की बात हो, लेकिन इस तरह की घटनाएं जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस की तत्परता पर गंभीर चिंता खड़ी करती हैं।
अब देखना यह होगा कि पुलिस बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी कब तक करती है, क्या सभी संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाता है और क्या इस पूरे प्रकरण में पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।