BREAKING: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया है. यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत दिया गया है. लोक कल्याण और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान के लिए चुना है.
आदिवासी आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में से एक
शिबू सोरेन राज्य की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में रहे. उनका जीवन संघर्ष, आंदोलन और सत्ता तीनों का प्रतीक रहा. उन्होंने न सिर्फ झारखंड राज्य के गठन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, बल्कि आदिवासी समाज को राजनीतिक पहचान दिलाने का काम भी किया.
दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में बीते साल हुआ निधन
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को तत्कालीन एकीकृत बिहार के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में एक संथाल परिवार में हुआ था. उनके पिता सोबरन मांझी शिक्षक थे, जबकि माता का नाम सोनामनी सोरेन था. महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष के दौरान उनके पिता की हत्या कर दी गई थी. इसी घटना ने शिबू सोरेन को आंदोलन और राजनीति की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की उम्र में दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उनका निधन हो गया. उनके सामाजिक और जनकल्याणकारी योगदान को देखते हुए जनवरी 2026 में उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान प्रदान किया गया.
झारखंड आंदोलन में निर्णायक भूमिका रही
झारखंड आंदोलन में शिबू सोरेन की भूमिका निर्णायक रही. महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने संथाल नवयुवक संघ का गठन कर महाजनी शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की. आगे चलकर 4 फरवरी 1973 को उन्होंने बिनोद बिहारी महतो और एके. रॉय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की. जल, जंगल, जमीन की रक्षा और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर उन्होंने दशकों तक आंदोलन का नेतृत्व किया. उनके अथक संघर्ष का परिणाम 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के रूप में सामने आया.
लंबा राजनीतिक करियर
राजनीतिक करियर में शिबू सोरेन ने लंबा सफर तय किया. वे 8 बार लोकसभा के सदस्य रहे और अधिकतर समय दुमका संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. इसके अलावा वे 3 बार राज्यसभा के सांसद भी बने. केंद्र की यूपीए सरकार में उन्होंने तीन बार केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई.
तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने
झारखंड राज्य बनने के बाद शिबू सोरेन तीन बार मुख्यमंत्री बने. पहली बार मार्च 2005 में वे मात्र दस दिन के लिए मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद अगस्त 2008 से जनवरी 2009 तक और फिर दिसंबर 2009 से मई 2010 तक उन्होंने राज्य की बागडोर संभाली. हालांकि गठबंधन की राजनीति के चलते वे अपना कोई भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए, लेकिन उनकी पहचान हमेशा एक आंदोलनकारी मुख्यमंत्री के रूप में बनी रही.
पिता की राजनीतिक विरासत को हेमंत सोरेन बढ़ा रहे आगे
शिबू सोरेन का पारिवारिक जीवन भी राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा. उनकी पत्नी का नाम रूपी सोरेन है. उनके तीन बेटे रहे जिनमें स्वर्गीय दुर्गा सोरेन, वर्तमान झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन शामिल हैं. शिबू सोरेन का जीवन झारखंड की मिट्टी, आदिवासी अस्मिता और जनसंघर्ष की कहानी के रूप में हमेशा याद किया जाएगा.