Narcissistic Relationship: आज के समय में कई रिश्ते बाहर से परफेक्ट दिखते हैं लेकिन भीतर से धीरे-धीरे खोखले होते जाते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी एक बड़ी वजह नार्सिसिस्टिक सोच है. जहां एक इंसान खुद को हर चीज का केंद्र मान लेता है और सामने वाले की भावनाएं धीरे-धीरे नजरअंदाज होने लगती हैं. सोशल मीडिया के दौर में तारीफ और अटेंशन की भूख रिश्तों पर भारी पड़ने लगी है.
क्या होता है नार्सिसिज्म?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार नार्सिसिज्म केवल रोमांटिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहता. इसका असर व्यक्ति के व्यवहार कामकाज और सामाजिक संबंधों पर भी दिखता है. ऐसे लोग भीतर से असुरक्षित होते हैं लेकिन बाहर से खुद को सबसे बेहतर साबित करना चाहते हैं. रिश्ते में यह असंतुलन तब पैदा होता है जब एक ही व्यक्ति की जरूरतें अहम बन जाती हैं और दूसरे की भावनाएं पीछे छूट जाती हैं.
जब रिश्ता बोझ लगने लगे
नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप में अक्सर एक पार्टनर खुद को सुना हुआ और थका हुआ महसूस करने लगता है. हर बातचीत किसी न किसी तरह सामने वाले की तारीफ या उसकी शर्तों पर खत्म होती है. धीरे-धीरे आत्मसम्मान पर असर पड़ता है और इंसान खुद को कमतर आंकने लगता है.
ये संकेत हो सकते हैं चेतावनी
विशेषज्ञ कहते हैं कि हर बहस या मतभेद नार्सिसिज्म नहीं होता लेकिन कुछ व्यवहार लगातार दिखें तो सतर्क होना जरूरी है. जैसे बार-बार आपकी बातों को घुमा देना जिससे आपको खुद पर शक होने लगे. हर समय तारीफ और मान्यता की मांग करना. आपकी परेशानी को हल्के में लेना या अनदेखा करना. रिश्ते के फैसले हमेशा अपनी मर्जी से तय करना. आपकी निजी सीमाओं का सम्मान न करना और बार-बार उन्हें तोड़ना.
लेबल लगाने में न करें जल्दबाजी
मनोवैज्ञानिक यह भी चेतावनी देते हैं कि आज नार्सिसिस्ट शब्द का इस्तेमाल बहुत आसानी से होने लगा है. हर स्वार्थी हर आत्मकेंद्रित व्यवहार को इसी दायरे में रखना सही नहीं है. बिना समझे किसी को नार्सिसिस्ट कहना रिश्ते को सुधारने के बजाय और ज्यादा बिगाड़ सकता है. जागरूक रहना जरूरी है लेकिन समझदारी के साथ.
रिश्ते और खुद की जिम्मेदारी
स्वस्थ रिश्ता आपसी सम्मान सहानुभूति और भावनात्मक सुरक्षा पर टिका होता है. अगर कोई रिश्ता आपको मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है तो खुद से सवाल करना जरूरी है. जरूरत पड़े तो काउंसलर या विशेषज्ञ की मदद लेना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी है. अपनी भावनाओं की सुरक्षा करना भी उतना ही जरूरी है जितना किसी और से प्यार करना.
नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप की पहचान आसान नहीं होती क्योंकि इसकी शुरुआत अक्सर आकर्षण और प्रशंसा से होती है. समय के साथ यह रिश्ता नियंत्रण और मानसिक थकान में बदल सकता है. ऐसे में जरूरी है कि इंसान अपनी भावनाओं को गंभीरता से ले और रिश्ते में संतुलन को प्राथमिकता दे. जागरूकता ही ऐसे रिश्तों से खुद को बचाने का पहला कदम है.