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  • 2026-01-26

Smartphone Side Effect: डिजिटल महामारी, युवाओं में बढ़ता स्मार्टफोन एडिक्शन, मानसिक स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा

Health: हालिया रिपोर्टों के अनुसार, स्मार्टफोन का इस्तेमाल अब केवल संचार तक सीमित नहीं रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मोबाइल की लत मस्तिष्क में डोपामिन नामक रसायन को ट्रिगर करती है, जो बिल्कुल वैसा ही है जैसा किसी नशीले पदार्थ के सेवन से होता है। इससे युवाओं में एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के कारण होने वाले प्रमुख साइड इफेक्ट्स को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जा सकता है, प्रभावित क्षेत्र मुख्य समस्या विवरण आंखें डिजिटल आई स्ट्रेन स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन पैदा करती है।

 मस्तिष्क अनिद्रा रात में फोन चलाने से मेलाटोनिन हार्मोन कम हो जाता है, जिससे नींद का चक्र बिगड़ जाता है। हड्डियां टेक्स्ट नेक घंटों गर्दन झुकाकर फोन देखने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन की मांसपेशियों में स्थाई दर्द हो सकता है। मानसिक स्थिति एंग्जायटी और डिप्रेशन | सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करने की आदत मानसिक तनाव का कारण बन रही है। 

रेडिएशन का सच और मिथक

अक्सर यह दावा किया जाता है कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होता है या दिमाग की कोशिकाएं मर जाती हैं। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन और नवीनतम शोधों के अनुसार, मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग होता है, जो सीधे तौर पर DNA को नुकसान नहीं पहुंचाता। लेकिन, लंबे समय तक फोन को शरीर के बिल्कुल करीब रखना जैसे तकिए के नीचे थर्मल प्रभाव डाल सकता है, जो नींद की गुणवत्ता को खराब करता है।

बचाव के उपाय, कैसे रहें सुरक्षित

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डिजिटल डिटॉक्स की सलाह दी है। मुख्य सुझाव इस प्रकार हैं 20-20-20 नियम, हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 20 फीट दूर देखें और 20 बार पलकें झपकाएं। बेडरूम से दूरी सोने से कम से कम 1 घंटा पहले फोन को खुद से दूर रखें। दूरी बनाए रखें फोन को चेहरे से कम से कम 16-20 इंच की दूरी पर रखें।

तकनीक वरदान है यदि इसका उपयोग सीमित और संतुलित हो। यदि समय रहते हमने अपने स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण नहीं पाया, तो यह आधुनिक सुविधा भविष्य की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आपदा बन सकती है।
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